श्रद्धेय प्रधानमंत्री जी,सादर प्रणाम। प्रधानमंत्री के रूप में आपके सफल नेतृत्व के बारह वर्ष पूर्ण होने तथा स्वतंत्र भारत के इतिहास में सर्वाधिक अवधि तक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में सेवा देने के इस ऐतिहासिक अवसर पर देवभूमि उत्तराखंड की समस्त जनता की ओर से मैं, आपको हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित करता हूं।
यह केवल बारह वर्षों का कालखंड नहीं है, बल्कि भारत के पुनर्जागरण, आत्मविश्वास, सांस्कृतिक पुनर्स्थापना, सुशासन और वैश्विक प्रतिष्ठा के अभूतपूर्व उत्कर्ष का एक स्वर्णिम अध्याय है। आपके दूरदर्शी, निर्णायक और जनोन्मुखी नेतृत्व में भारत ने विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा, सांस्कृतिक गौरव और जनकल्याण के क्षेत्र में जो ऐतिहासिक उपलब्धियां अर्जित की हैं, वे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगी।
(जीएसटी) के माध्यम से एक राष्ट्र-एक कर की अवधारणा को साकार करना, डिजिटल इंडिया अभियान और यूपीआइ के जरिए भारत को विश्व का अग्रणी डिजिटल भुगतान तंत्र बनाना, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का क्रियान्वयन, आत्मनिर्भर भारत अभियान तथा रक्षा उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि आपके दूरदर्शी नेतृत्व के सशक्त प्रमाण हैं।
अनुच्छेद-370 और 35-ए का हटना, तीन तलाक जैसी कुप्रथा से मुस्लिम महिलाओं को मुक्ति दिलाना, नागरिकता संशोधन अधिनियम का लागू होना तथा नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसे ऐतिहासिक निर्णय आपके साहसिक और दूरदर्शी नेतृत्व की पहचान हैं। जी-20 की सफल अध्यक्षता, चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता, ने वैश्विक मंच पर भारत को अभूतपूर्व ऊंचाई प्रदान की है।
आदरणीय प्रधानमंत्री जी, उत्तराखंड के प्रति आपका आत्मीय लगाव हम सभी के लिए सदैव प्रेरणा का विषय रहा है। देवभूमि के प्रति आपका विशेष स्नेह केवल शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि आपके प्रत्येक निर्णय और प्रत्येक पहल में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण से लेकर बदरीनाथ धाम मास्टर प्लान, चारधाम आल दर रोड परियोजना, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे, हेली सेवाओं के विस्तार तथा सीमांत क्षेत्रों के विकास के माध्यम से आपने प्रदेश के विकास को नई गति प्रदान की है।
यह केवल आधारभूत संरचना का विस्तार नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को सुविधा और सुरक्षा से जोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है।
मैं, विशेष रूप से जमरानी बहुउद्देशीय बांध परियोजना का उल्लेख करना चाहूंगा, जो लगभग पांच दशकों तक विभिन्न कारणों से लंबित रही। आपके निर्णायक नेतृत्व में इस महत्वपूर्ण परियोजना को नई गति मिली और इसके क्रियान्वयन का मार्ग प्रशस्त हुआ।
इसके पूर्ण होने के पश्चात राज्य के तराई क्षेत्र की भावी पेयजल एवं सिंचाई आवश्यकताओं की पूर्ति सुनिश्चित होगी और लाखों लोग को इसका लाभ प्राप्त होगा। आने वाली पीढ़ियां भी इस दूरदर्शी निर्णय के लिए सदैव आपकी ऋणी रहेंगी। जब-जब प्राकृतिक आपदाओं ने उत्तराखंड को चुनौती दी, तब-तब आपने एक अभिभावक की भांति राज्य के साथ खड़े होकर उसका संबल बढ़ाया।
आदरणीय प्रधानमंत्री जी, उत्तराखंड की जनता सदैव यह अनुभव करती है कि आपने इस देवभूमि को केवल एक राज्य के रूप में नहीं, बल्कि अपनी आत्मीय भूमि के रूप में अपनाया है।
संभवतः आप स्वतंत्र भारत के ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने उत्तराखंड की धरती पर सर्वाधिक बार आकर यहां के लोग के साथ अपना स्नेह और अपनापन साझा किया है। देवभूमि की जनता के लिए आप केवल देश के प्रधानमंत्री ही नहीं, बल्कि एक ऐसे आत्मीय अभिभावक हैं, जिनके स्नेह, मार्गदर्शन और संकल्प ने राज्य की आकांक्षाओं को नई ऊंचाइयां प्रदान की हैं।
हम सभी आपके स्वस्थ, दीर्घायु और यशस्वी जीवन की कामना करते हैं तथा विश्वास व्यक्त करते हैं कि आपके नेतृत्व में भारत अमृतकाल के इस दौर में विकसित राष्ट्र के अपने ‘विकल्प रहित संकल्प’ को अवश्य प्राप्त करेगा और वर्ष 2047 तक विश्व के अग्रणी राष्ट्रों में अपना गौरवपूर्ण स्थान स्थापित करेगा।
अंत में, अपनी भावनाओं को इन पंक्तियों के माध्यम से व्यक्त करना चाहूंगा।
कुछ नाम समय के पन्नों पर लिखे नहीं जाते हैं…
वे राष्ट्र की धड़कन बनकर युगों-युगों तक गाए जाते हैं।
जब भी भारत के स्वर्णिम काल की चर्चा संसार करेगा…
आपके यश का उजियारा हर युग का पथ आलोकित करेगा।