अमेरिका और ईरान के बीच प्रारंभिक समझौता मसौदे पर सहमति बनने के बाद शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ हुए समझौते का सबसे अहम हिस्सा यह है कि तेहरान परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा।
उन्होंने इस पर सहमति दी है। रायटर के अनुसार, ट्रंप ने बताया कि समझौते को लागू कराने के लिए सख्त निगरानी व्यवस्था होगी।
इसके जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ईरान समझौते की शर्तों का पालन करे। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे दोनों देशों के रिश्तों में सुधार होगा। हालांकि ट्रंप ने चेतावनी भी दी कि अगर समझौता सफल नहीं रहा तो हालात फिर पहले जैसे हो सकते हैं।
उन्होंने कहा, “उम्मीद है कि हमारे संबंध अच्छे रहेंगे, और अगर ऐसा नहीं हुआ तो हम फिर वहीं पहुंच जाएंगे जहां से शुरुआत हुई थी।” ट्रंप ने कहा है कि ईरान को आर्थिक प्रतिबंधों से राहत तभी मिलेगी, जब वह समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारियां पूरी करेगा।
ट्रंप बोले- परमाणु संवर्धन पर अभी बनी नहीं है पूरी सहमतिहालांकि, ट्रंप ने स्वीकार किया है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों पक्षों के बीच अभी पूर्ण सहमति नहीं बन पाई है। न्यूयार्क टाइम्स को दिए साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका चाहता है कि ईरान 20 वर्षों तक यूरेनियम संवर्धन बंद रखे, जबकि तेहरान अधिकतम 10 वर्ष की अवधि पर जोर दे रहा है।
ट्रंप ने संकेत दिया कि वह 15 वर्ष के समझौते पर विचार कर सकते हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान को केवल गैर-सैन्य उद्देश्यों के लिए ही सीमित स्तर तक यूरेनियम संवर्धन की अनुमति दी जाएगी। उन्होंने कहा कि नए समझौते का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम हमेशा शांतिपूर्ण उपयोग तक ही सीमित रहे।ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत अच्छी रही, लेकिन बीच में अमेरिका को दो रात सैन्य कार्रवाई करनी पड़ी।
उन्होंने कहा, “हमारी ईरान के साथ बहुत अच्छी बन रही थी। मुझे दुख हुआ कि हमें दो रात के लिए वापस जाकर हमला करना पड़ा।”अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि ईरान के साथ परमाणु कार्यक्रम से जुड़े अंतिम समझौते की संसद में समीक्षा होगी और उसके बाद उसे स्वीकृति दी जाएगी।