ट्रंप प्रशासन के नए टैक्स के खिलाफ 25 राज्यों ने सोमवार को मुकदमा दायर कर दिया है। राज्यों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा फरवरी में पुराने आयात करों को रद किए जाने के बाद, प्रशासन अवैध रूप से टैक्स बढ़ाने के लिए नए बहानों का सहारा ले रहा है।
बता दें कि पिछले महीने अमेरिका ने 59 देशों और यूरोपीय संघ पर भारी आयात कर लगाए थे। प्रशासन का तर्क था कि ये देश जबरन श्रम से बने उत्पादों को रोकने में नाकाम रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले अस्थायी टैक्स लगाए थे, जिनकी मियाद खत्म होने पर अब नए कदम उठाए गए हैं।
समझिए क्या है कानूनी लड़ाई?
न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिटिया जेम्स समेत 25 राज्यों ने इस कदम को अवैध बताया है। उनका कहना है कि इससे अमेरिकी परिवारों और व्यवसायों पर बोझ बढ़ेगा।
पिछले साल राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रेड डेफिसिट को राष्ट्रीय आपातकाल बताकर टैक्स लगाए थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि राष्ट्रपति के पास ऐसे कर लगाने का अधिकार नहीं है। इसके बाद सरकार को आयातकों को पैसे रिफंड करने पड़े थे।
ट्रंप प्रशासन का नया दांव समझिए
गौरतलब है कि पुरानी भरपाई के लिए अब ट्रंप प्रशासन ने ‘ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 301’ का इस्तेमाल किया है।
इसके तहत अनुचित व्यापार प्रथाओं और जबरन श्रम रोकने में असफल रहने वाले देशों पर 10% से 12.5% तक का टैक्स लगाया गया है। व्हाइट हाउस ने इस कार्रवाई को पूरी तरह वैध बताया है और कहा है कि यह अमेरिकी श्रमिकों और व्यापार को बचाने के लिए जरूरी है।