अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि सऊदी अरब के साथ असैन्य परमाणु समझौते के तहत यह आवश्यक है कि इस देश को अब्राहम संधि के तहत इजरायल के साथ अपने संबंधों को सामान्य करने होंगे।
ट्रंप ने सऊदी अरब के साथ इस समझौते को मंजूरी दी है। अमेरिका और सऊदी अरब के बीच समझौते से दुनिया में परमाणु हथियारों को लेकर होड़ शुरू होने का अंदेशा जताया जा रहा है।
ट्रंप ने इंटरनेट मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि इस समझौते में यूरेनियम संवर्धन की अनुमति नहीं है। हालांकि परमाणु अप्रसार विशेषज्ञों ने इस समझौते पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे परमाणु सामग्री को हथियार बनाने लायक स्तर तक संवर्धन को रोकने के लिए आवश्यक सुरक्षा उपाय नहीं है।
ट्रंप ने पोस्ट में कहा, ‘इस समझौते को मंजूरी मिल जाएगी, लेकिन यह पूरी तरह से सऊदी अरब के अब्राहम समझौते में शामिल होने पर निर्भर है।’
इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका असैन्य (गैर-संवर्धित) परमाणु संयंत्रों के खिलाफ नहीं है। जबकि सऊदी अरब ने साफ किया है कि इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने के लिए पहले फलस्तीन की स्थापना के लिए स्पष्ट रास्ता बनाना जरूरी होगा। बुधवार को घोषित इस समझौते के लिए अमेरिकी संसद की मंजूरी की जरूरत है।
इजरायल को अंदेशा, शुरू हो सकती है हथियारों की होड़
रायटर के अनुसार, अमेरिका और सऊदी अरब के बीच परमाणु समझौते से इजरायल को इस बात का अंदेशा है कि पश्चिम एशिया में हथियारों की होड़ शुरू हो सकती है।
हालांकि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनके रक्षा व विदेश मंत्रियों ने अभी तक समझौते पर कोई टिप्पणी नहीं की है। जबकि आलोचकों का कहना है कि इससे इजरायल के सुरक्षा हितों के साथ समझौता होता है।