अमेरिका और ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए एक समझौते को अंतिम रूप दे दिया है। इसपर 19 जून को हस्ताक्षर होने हैं। समझौते को संभव बनाने में कई लोगों की अहम भूमिका रही। इसमें ट्रंप, जेडी वेंस, स्टीव विटकाफ से लेकर अब्बास अराघची, मोहम्मद बाकर गलीबाफ, शहबाज शरीफ आदि शामिल हैं।
दरअसल, ट्रंप खुद को शांतिदूत के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। यही कारण है कि उन्होंने समझौते को विदेश नीति की बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश किया है। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने अप्रैल की शुरुआत में इस्लामाबाद में ईरान के साथ बातचीत के दौरान अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था।
उन्होंने वाशिंगटन के रुख को तय करने में मदद की। पश्चिम एशिया के लिए ट्रंप के विशेष दूत विटकाफ ने ईरानी प्रतिनिधियों के साथ बैक-चैनल बातचीत के बाद मतभेदों को दूर करने के लिए फ्रेमवर्क डील तैयार करने में अहम भूमिका निभाई।
वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची पाकिस्तान की मध्यस्थता वाली टीम के साथ बातचीत में मुख्य प्रतिनिधि रहे। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गलीबाफ ने अप्रैल की शुरुआत में इस्लामाबाद में हुई पहली सीधी बातचीत में ईरान के मुख्य वार्ताकार थे।पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बातचीत में मध्यस्थ की अहम भूमिका निभाई।
उन्होंने शनिवार को बताया था कि समझौते को अगले 24 घंटों के भीतर अंतिम रूप दिए जाने और उस पर इलेक्ट्रानिक रूप से हस्ताक्षर किए जाने की उम्मीद है। सेना प्रमुख आसिम मुनीर की दोनों देशों के प्रतिनिधियों से पर्दे के पीछे बातचीत जारी रही।