अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर, 170 ठिकानों पर अमेरिकी हमले का दावा; चाबहार में विस्फोट, तेहरान का पलटवार…

 अमेरिका और ईरान के बीच गुरुवार को संघर्ष और भीषण स्तर पर पहुंच गया। अमेरिकी सेना ने अप्रैल के बाद पहली बार ईरान के रणनीतिक पुलों पर हमला किया।

इसके साथ ही ईरान के रणनीतिक महत्व के चाबहार बंदरगाह, बुशहर परमाणु संयंत्र के आसपास और बंदर अब्बास क्षेत्र में भी विस्फोटों की खबरें आईं। चाबहार पर हमले से वहां बिद्युत व्यवस्था ठप हो गई और अंधेरा छा गया। 

ईरान ने दिया जव

जवाब में ईरान ने बहरीन, कुवैत, जॉर्डन और कतर में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया।

लगातार दूसरे दिन हुई सैन्य कार्रवाई के बाद पिछले महीने हुआ युद्धविराम लगभग बेअसर होता दिख रहा है। अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतें भी 78 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई हैं, जो समझौते के बाद 72 डॉलर तक आ गई थीं।

रॉयटर्स ने केप्लर के हवाले से बताया कि गुरुवार को होर्मुज स्ट्रेट से तेल टैंकरों की आवाजाही लगभग ठप रही और केवल तीन जहाज ही जलडमरूमध्य को पार कर आगे बढ़ सके। कतर ने एलएनजी टैंकरों को होर्मुज की तरफ बढ़ने से रोक दिया है।

न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकाम) ने दावा किया कि पिछले 48 घंटों में ईरान के 170 से अधिक सैन्य ठिकानों पर हमले किए गए। इनमें वायु रक्षा प्रणाली, मिसाइल और ड्रोन ठिकाने, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की 60 स्पीड बोट, तटीय रडार और सैन्य रसद ढांचे को निशाना बनाया गया।

अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों पर हमले की ईरान की क्षमता को कमजोर करना था।

एपी के अनुसार, ईरानी अधिकारियों ने आरोप लगाया कि अमेरिकी हमलों में गोल्डिस्तान प्रांत में तेहरान-मशहद रेलवे लाइन के एक पुल को भी निशाना बनाया गया। यह पुल ईरान के उस महत्वपूर्ण रेल कारिडोर को जोड़ता है, जो चीन और तुर्कमेनिस्तान तक पहुंचता है।

ईरानी मीडिया ने बुशहर परमाणु संयंत्र के आसपास, अबू मूसा द्वीप और बंदर अब्बास क्षेत्र में विस्फोटों की भी सूचना दी। हालांकि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आइएईए) ने परमाणु संयंत्र को किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं की है।

14 लोगों की मौत

अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत हुई, जबकि 78 लोग घायल हुए हैं। खुजेस्तान प्रांत में आइआरजीसी के दो और बसीज का सदस्य भी मारा गया।

जवाबी कार्रवाई में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कार्प्स (आइआरजीसी) ने बहरीन, कुवैत और कतर में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन दागने का दावा किया।

जॉर्डन ने भी अपने हवाई क्षेत्र में कई मिसाइलें रोकने की जानकारी दी, जबकि कुवैत और बहरीन ने अधिकांश हमलों को विफल करने का दावा किया।

एएनआइ के अनुसार,अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों पर दोबारा हमला हुआ तो अमेरिका ‘पहले से कहीं अधिक कड़ा जवाब’ देगा।

दूसरी ओर ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गलीबाफ ने कहा कि ईरान पर हमला हुआ तो उसका जवाब भी उसी ताकत से दिया जाएगा।

विश्लेषकों का कहना है कि दोनों देश अब ‘आक्रमण-प्रति आक्रमण-विराम’ के ऐसे चक्र में फंस गए हैं, जिसमें हर नई कार्रवाई के बाद तनाव कुछ समय के लिए थमता है, लेकिन फिर दोबारा भड़क उठता है।

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