US-Iran Deal: पाकिस्तान को नहीं मिला मंच, शहबाज शरीफ का स्विट्जरलैंड दौरा अचानक रद…

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते के औपचारिक समारोह में शामिल होने के लिए प्रस्तावित स्विट्जरलैंड दौरा स्थगित कर दिया।

अमेरिका-ईरान के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर पहले ही डिजिटल माध्यम से हस्ताक्षर हो चुके हैं और यह तत्काल प्रभाव से लागू भी हो गया है।

प्रधानमंत्री के प्रवक्ता मोशर्रफ जैदी ने बताया कि स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में शुक्रवार को प्रस्तावित हस्ताक्षर समारोह अब आवश्यक नहीं रह गया है, क्योंकि समझौते पर इलेक्ट्रॉनिक रूप से हस्ताक्षर किए जा चुके हैं।

इससे कुछ घंटे पहले शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी दी थी कि समझौता तत्काल प्रभाव से लागू होगा। उन्होंने कहा कि पहले चरण में ईरान तुरंत होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल देगा, जबकि अमेरिका ईरान पर लगाए गए नौसैनिक नाकाबंदी को तत्काल हटाएगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य का वैश्विक महत्व

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है।

फरवरी के अंत में हुए अमेरिका-इजराइल हमलों के बाद मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ गया था, जिसके जवाब में ईरान ने मार्च की शुरुआत से इस जलमार्ग पर प्रभावी नाकाबंदी कर दी थी। इसके बाद अमेरिका ने अप्रैल में ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी लागू की थी।

समारोह भी रद होने के संकेत

पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री इशाक डार ने बीबीसी उर्दू से बातचीत में कहा कि समझौते पर दूरस्थ माध्यम से हस्ताक्षर होने के कारण औपचारिक समारोह को भी रद कर दिया गया है।

समारोह को लेकर सवाल तब उठने लगे थे, जब शहबाज शरीफ ने अपने एक्स पोस्ट में संशोधन करते हुए वह अनुच्छेद हटा दिया, जिसमें कहा गया था कि पाकिस्तान और सह-मध्यस्थ कतर के सहयोग से 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड में आधिकारिक समारोह आयोजित किया जाएगा।

पाकिस्तान ने निभाई मध्यस्थ की भूमिका

इस पूरे समझौते में पाकिस्तान ने मध्यस्थ की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पाकिस्तान और कतर के प्रयासों से अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता आगे बढ़ी, जिसके परिणामस्वरूप दोनों देशों ने तनाव कम करने और समुद्री व्यापार को सामान्य बनाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि समझौते के लागू होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार और मध्य-पूर्व क्षेत्र में स्थिरता आने की संभावना बढ़ेगी।

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