US-ईरान समझौते पर बड़ा सवाल: सफलता का क्रेडिट किसे, विफलता की कीमत कौन चुकाएगा?…

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इन दिनों अपनी नई पुस्तक के प्रचार से अधिक ईरान के साथ हुए अस्थायी शांति समझौते को लेकर चर्चा में हैं।

विदेशों में सैन्य हस्तक्षेप के आलोचक माने जाने वाले वेंस अब राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और तेहरान के बीच हुए समझौते के सबसे प्रमुख पैरोकार बनकर उभरे हैं।

ईरान समझौते से वेंस को फायदा या नुकसान?

ईरान समझौते की सफलता या विफलता न केवल ट्रंप प्रशासन बल्कि जेडी वेंस के भविष्य के राजनीतिक सफर के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

वेंस लगातार साक्षात्कारों और सार्वजनिक मंचों पर इस समझौते का बचाव कर रहे हैं। शुक्रवार को उनके स्विट्जरलैंड जाकर ईरान के साथ वार्ता के अगले चरण की शुरुआत करने की भी संभावना है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह समझौता सफल रहता है तो वेंस को एक ऐसे नेता के रूप में देखा जा सकता है जिसने लंबे और अलोकप्रिय संघर्ष को समाप्त कराने में अहम भूमिका निभाई। वहीं, समझौता विफल होने पर इसकी राजनीतिक कीमत भी उन्हें चुकानी पड़ सकती है।

खुद ट्रंप ने भी मजाकिया अंदाज में कहा, ‘अगर यह कामयाब रहा तो श्रेय मैं लूंगा और अगर असफल रहा तो जिम्मेदारी जेडी की होगी।’

ईरान समझौते पर उठे सवाल

इस बीच समझौते के मसौदे को सार्वजनिक किए जाने के बाद अमेरिका में बहस तेज हो गई है। कई रिपब्लिकन और डेमोक्रेट सांसदों के साथ इजरायल समर्थक समूहों ने भी सवाल उठाए हैं।

आलोचकों का कहना है कि समझौते में ईरान को शुरुआती लाभ ज्यादा मिलते दिख रहे हैं, जबकि उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर कई महत्वपूर्ण मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं।

वेंस ने इन आलोचनाओं का जवाब देते हुए कहा है कि समझौते का लाभ तभी मिलेगा जब ईरान अपनी सभी प्रतिबद्धताओं का पालन करेगा।

वेंस ने यह भी जोर दिया कि यह संघर्ष इराक युद्ध जैसी स्थिति नहीं बनने वाला है और ट्रंप की नीति का उद्देश्य लंबे सैन्य दलदल से बचते हुए कूटनीतिक समाधान खोजना है।

हालांकि, रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी मतभेद बने हुए हैं। कुछ नेताओं ने समझौते पर चिंता जताई है, जबकि अन्य का मानना है कि बातचीत के जरिये समाधान तलाशने में कोई नुकसान नहीं है।

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