तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) के समर्थकों ने पंजाब के शेखूपुरा में रातोंरात कैंप बना लिए हैं।
ये लोग फिलिस्तीनियों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए राजधानी इस्लामाबाद पहुंचना चाहते हैं। इससे पहले दिन में, टीएलपी कार्यकर्ताओं के इस्लामाबाद की ओर मार्च शुरू करने के बाद पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन भड़क उठे।
लाहौर में पुलिस के साथ हिंसक झड़पें हुईं और अधिकारियों ने राजधानी में सड़कों पर आवाजाही को रोक दिया। इंटरनेट सर्विस पर भी पाबंदी लगा दी गई।
टीएलपी की ओर से ‘गाजा मार्च’ लाहौर में मुल्तान रोड पर पार्टी मुख्यालय से जुमे की नमाज के बाद शुरू हुआ। TLP प्रमुख साद रिजवी के नेतृत्व में इस जुलूस में हजारों समर्थकों ने हिस्सा लिया, जो धार्मिक नारे लगा रहे थे।
इनमें से कई के पास लाठियां, छड़ें और ईंटें थीं। पुलिस ने यतीम खाना चौक, चौबुर्जी, आजादी चौक और शाहदरा जैसे प्रमुख चौराहों पर बैरिकेड्स लगाए थे।
आंसू गैस का इस्तेमाल करके रैली को रोकने की कोशिश की गई, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़ दिए और इस्लामाबाद की ओर बढ़ते रहे।
मेट्रो ट्रैक पर जमाया कब्जा
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ टीएलपी समर्थकों ने ऑरेंज लाइन मेट्रो ट्रैक पर कब्जा कर लिया। उन्होंने सुरक्षा बलों पर पथराव किया, जिससे कई पुलिस अधिकारी घायल हो गए।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में प्रदर्शनकारी लाहौर वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी और पंजाब पुलिस की क्रेन जैसे सरकारी वाहनों को अपने कब्जे में लेते नजर आ रहे हैं।
लाहौर के आजादी चौक के पास झड़पें तेज हो गईं, जहां कई पुलिस वाहन क्षतिग्रस्त हुए और कई अधिकारी घायल हो गए।
वीडियो में सुरक्षा कर्मियों को आंसू गैस छोड़ते और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए गोलीबारी करते देखा गया। कुछ अधिकारी सुरक्षित स्थानों की ओर भागते नजर आए।
गोलबारी में मौत के दावे
लाहौर पुलिस ने बताया कि दर्जनों अधिकारी घायल हुए हैं। टीएलपी का दावा है कि उनके कई कार्यकर्ता घायल हो गए और कुछ की पुलिस की गोलीबारी में मौत हो गई।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। इस बीच, लाहौर की आतंकवाद निरोधी अदालत ने 110 टीएलपी कार्यकर्ताओं को पुलिस हिरासत में 12 दिनों के लिए भेज दिया।
इन पर प्रदर्शन के दौरान अधिकारियों पर हमला करने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का आरोप है।
नवांकोट पुलिस की ओर से दर्ज FIR में समूह पर गोलीबारी और सुरक्षा कर्मियों के खिलाफ हिंसा का आरोप लगाया गया है।