यूपी क्राइम: साइको आमिर ने पुलिस की थ्योरी को किया फेल, सामूहिक हत्याकांड की असली कहानी आई सामने…

मां और चार बच्चों की हत्या के सूत्रधार आमिर को पुलिस भले ही साइको बता रही, लेकिन उसकी साजिश पुलिस की सोच से चार कदम आगे निकली। यही वजह रही पुलिस की पहले दिन की थ्योरी मात खा गई।

बिना सर्च आपरेशन चलाए व डाग स्क्वायड की मदद लिए निष्कर्ष की जल्दबाजी भी एक वजह रही। वहीं, बड़ा सवाल अब भी अनुत्तरित है कि इतनी बड़ी घटना में क्या अकेले आमिर ही शामिल रहा, इस पर पीड़ित स्वजन को यकीन नहीं है। उनका कहना है कि और जो भी शामिल हों, उनका हश्र भी आमिर जैसा ही हो।

यह है पूरा मामला

शनिवार को पुलिस के डायल 112 पर तीन बजकर 40 मिनट पर सूचना मिली कि मुरादाबाद मुहल्ले के एक मकान में चार बच्चों की हत्या कर दी गई। इस पर कोतवाली नगर पुलिस के अलावा एसपी समेत अन्य पुलिस अधिकारी पहुंच गए। फील्ड यूनिट को भी बुलाया। यह मकान सऊदी अरब में रहे नियाज अहमद का है।

पुलिस भीतर से बंद मुख्य गेट खुलवाकर अंदर घुसी तो एक कमरे में चारों बच्चों सफीक, सउद, उमर व साफिया के शव बेड पर पड़े थे, जबकि बच्चों की मां गासिया का कुछ पता नहीं था। करीब एक घंटे की छानबीन के बाद पुलिस ने यह निष्कर्ष निकाल लिया कि मां ही बच्चों की हत्या कर फरार हो गई।

पुलिस की यह सोच सामान्य व्यक्ति वाली रही। उसने गासिया की तलाश में इलाके में सर्च अभियान चलाने के बजाय बच्चों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजते हुए गासिया को गुनहगार मान गिरफ्तारी के लिए नात-रिश्तेदारों के यहां छापेमारी शुरू कर दी। कई स्वजन को कोतवाली में ले आकर बैठा लिया।

ऐसा तब जबकि गासिया के पिता फैजू व अन्य रिश्तेदार यह बात कह रहे थे कि वह बच्चों की हत्या नहीं कर सकती है। उसे भी शायद मार दिया गया। एक-दो दिन में उसकी लाश मिल जाएगी।

इन सबके बावजूद डीआइजी और एडीजी तक घटनास्थल का निरीक्षण करने चले आए, लेकिन मंडल मुख्यालय से डाग स्क्वायड तक बुलाने की जरूरत नहीं महसूस की। अगले दिन जब घटना स्थल के आसपास छानबीन की गई तो स्थानीय व्यक्ति ने नाले में शव पड़ा होने की जानकारी दी। गासिया का शव बरामद होने पर पुलिस थ्योरी ही बिगड़ गई।

जानकारों का कहना है कि यदि उसी दिन डाग स्क्वायड की मदद ली गई होती तो घर से महज सौ मीटर दूर स्थित नाले में फेंका गया शव बरामद हो गया होता। ऐसे में गासिया पर जहां बच्चों की हत्या का कलंक नहीं लगता, वहीं हत्यारा पहले ही गिरफ्त में होता।

जैसा कि पुलिस सूत्र बताते हैं कि आमिर मकान में रात एक बजे घुसा। उसने कहासुनी पर सबसे पहले गासिया के सिर पर सिल के बट्टे (लोढ़ा) से वार कर दिया, जिससे वह बेहोश हो गई। इसके बाद सो रहे बच्चों पर बारी-बारी से लोढ़ा वार कर मार दिया।

अब ऐसे में सवाल है कि आखिर आमिर गासिया को घर से अकेले उठाकर कैसे ले गया। इसका भी जवाब यूं दिया जा रहा है कि बच्चों की हत्या का शक गासिया पर जाए, इसलिए उसे बालकनी से नीचे फेंककर आमिर ने दरवाजा भीतर से बंद कर दिया।

साथ ही वह भी बालकनी से कूदने के बाद बेहोशी की हालत में रही गासिया को घसीटते हुए नाले में ले जाकर ढकेल दिया। पुलिस की इस कहानी पर भी यकीन कर लिया जाए तो इससे स्पष्ट होता है कि आमिर की साजिश पुलिस की सोच से आगे निकली।

उसने योजनाबद्ध तरीके से न सिर्फ घटना की बल्कि गासिया का फोन तक फार्मेट कर दिया। उसके कपड़े भी गायब कर दिए। हत्या में प्रयुक्त लोढ़ा भी नाले के किनारे झाड़ी में फेंक दिया।

बहरहाल, एसपी प्राची सिंह का कहना है कि आमिर ही घटना का सूत्रधार रहा। त्वरित कार्रवाई की गई। सोमवार को वह पुलिस मुठभेड़ में मार दिया गया। आगे विवेचना प्रचलित है, जो भी तथ्य और मिलेंगे, उस अनुरूप कार्रवाई होगी। जिला मुख्यालय पर डाग स्क्वायड के लिए पुलिस मुख्यालय को पत्राचार किया गया है।

घटना से जुड़े सवाल अब भी कायम

  • जिस तरीके से घटना की गई और पुलिस को गुमराह करने की कुचेष्टा हुई, इसमें सिर्फ आमिर ही शामिल रहा?
  • मां और चार बच्चों की हत्या एक ही व्यक्ति ने एक लोढ़ा से कर दी और किसी की चीख तक नहीं निकली न ही प्रतिरोध हुआ?
  • कुछ स्वजन और गासिया के पति को भी आमिर के बारे में पहले से ही पता था तो उन्होंने यह बात पुलिस को तत्काल क्यों नहीं बताई?

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