यूपी 69,000 शिक्षक भर्ती मामला: ‘आरक्षित वर्ग उठा रहा आरक्षण के दोहरे लाभ का फायदा’, सुप्रीम कोर्ट में सामान्य वर्ग के शिक्षकों की दलील…

उत्तर प्रदेश में 69000 सहायक शिक्षकों की भर्ती मामले में मंगलवार को नौकरी कर रहे सामान्य वर्ग के शिक्षकों की ओर से वरिष्ठ वकील ने दलीलें पेश कीं। वरिष्ठ वकील शोभा गुप्ता ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की खंडपीठ के आदेश का विरोध करते हुए कहा कि उनके मुवक्किलों का चयन ठीक हुआ है।

उन्होंने कहा कि आरक्षित वर्ग आरक्षण का दोहरा लाभ ले रहा है। आरक्षित वर्ग ने पहले टीईटी परीक्षा में आयु, फीस, पासिंग अंक आदि में छूट ली और यही आरक्षित वर्ग अब सहायक अध्यापक लिखित पात्रता परीक्षा में दोबारा छूट ले रहा है। यह छूट एक तरह से रिलेक्शेसन नहीं, बल्कि आरक्षण है। मामले में बुधवार को भी बहस जारी रहेगी।

न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी और एनवी अंजारियों की पीठ उत्तर प्रदेश के 69000 सहायक शिक्षकों की भर्ती मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की खंडपीठ के 13 अगस्त 2024 के फैसले को चुनौती देने वाली नौकरी कर रहे अनारक्षित वर्ग की याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है।

हाई कोर्ट की खंडपीठ ने भर्ती चयन लिस्ट रद कर दी थी और प्रदेश सरकार को तीन महीने के भीतर नई मेरिट लिस्ट तैयार करने का आदेश दिया था, जिसमें की बेसिक शिक्षा नियमावली 1981 तथा आरक्षण नियमावली 1994 के आरक्षण नियमों का पालन करने का आदेश दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने शुरुआती सुनवाई में ही हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी। हालांकि, इस मामले में सामान्य वर्ग के नौकरी कर रहे शिक्षकों के अलावा आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने भी हस्तक्षेप अर्जी दाखिल कर रखी है।

मामले में मंगलवार को केस की मेरिट पर बहस हुई और सामान्य वर्ग के नौकरी कर रहे शिक्षकों की ओर से वरिष्ठ वकील शोभा गुप्ता ने दलीलें रखीं।

गुप्ता ने दोहरे आरक्षण के अलावा यह भी कहा कि हाई कोर्ट का आदेश लागू होने से नौकरी कर रहे बहुत से शिक्षकों की नौकरी चली जाएगी। उन्होंने इस भर्ती का और एकल पीठ व खंडपीठ के आए फैसलों का सिलसिलेवार ब्योरा दिया।

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