सरकारी विभागों में निजी क्षेत्र और अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञों की सीधी भर्ती (जिसे ‘लैटरल एंट्री’ कहा जाता है) को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर सरकार ने स्थिति साफ कर दी है।
केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने बुधवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में स्पष्ट किया कि लैटरल एंट्री की प्रक्रिया पर कोई रोक नहीं लगाई गई है, बल्कि इस विषय पर सभी हितधारकों के साथ गंभीर विचार-विमर्श चल रहा है।
मंत्रालय की 12 वर्षों की उपलब्धियों को रेखांकित करने के लिए आयोजित इस प्रेस वार्ता में जब मंत्री से लैटरल एंट्री की वर्तमान स्थिति पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने दोटूक कहा, “प्रक्रिया को निलंबित करने का ऐसा कोई आदेश नहीं है।”
उन्होंने यह भी कहा कि यह संवाद केवल संबंधित मंत्रालयों तक सीमित नहीं है, बल्कि इस व्यवस्था से जुड़े हर एक पक्ष और व्यक्ति से राय ली जा रही है ताकि भविष्य का रास्ता पारदर्शी और सर्वमान्य हो।
गौरतलब है कि अगस्त 2024 में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने आरक्षण प्रविधान न होने के कारण उपजे राजनीतिक विवाद के बाद प्रमुख पदों पर लैटरल एंट्री के विज्ञापन को रद कर दिया था। कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग की सचिव रचना शाह ने इस पहल को सरकार का एक बेहद महत्वपूर्ण कदम बताया।