मध्य प्रदेश विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक पेश, विवाह के एक साल बाद ही होगी तलाक की अर्जी स्वीकार…

मध्य प्रदेश विधानसभा में सोमवार को मानसून सत्र के पहले ही दिन समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक- 2026 प्रस्तुत कर दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कैबिनेट की मंजूरी के बाद राज्य मंत्री गौतम टेटवाल ने इसे सदन के पटल पर रखा।

इस दौरान विपक्षी दल कांग्रेस ने बिल को पूरक कार्यसूची के जरिए अचानक लाने पर आपत्ति जताते हुए भारी हंगामा किया। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के अनुसार, इस विधेयक पर मंगलवार को विस्तृत चर्चा की जाएगी।

मध्य प्रदेश विधानसभा में पेश यूसीसी विधेयक मुस्लिम समुदाय के व्यक्तिगत कानूनों (मुस्लिम पर्सनल ला) को बुनियादी तौर पर बदल देगा। इसके तहत शादी और विवाह विच्छेद, उत्तराधिकार और वसीयत, भरण-पोषण और संरक्षण के लिए नियम बनाए गए हैं।

वहीं, बच्चा गोद लेने के लिए भी नए प्रविधान किए गए हैं। यूसीसी लागू होने के बाद मध्य प्रदेश में बहुविवाह (चार शादियां) और निकाह हलाला पूरी तरह प्रतिबंधित होंगे।

शादी के लिए लड़कियों की उम्र अनिवार्य रूप से 18 वर्ष होगी और तलाक केवल अदालत के माध्यम से ही संभव होगा। विवाह के एक वर्ष बाद ही विवाह विच्छेद की अर्जी पर विचार हो सकेगा।

मुस्लिम पर्सनल ला की एक-तिहाई संपत्ति वसीयत करने की सीमा समाप्त हो जाएगी, जिससे मुस्लिम नागरिक अपनी शत- प्रतिशत संपत्ति किसी को भी वसीयत कर सकेंगे। बिना वसीयत की संपत्ति में बेटियों को बेटों के बराबर हक मिलेगा।

तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को आजीवन भत्ता

तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को इद्दत (तलाक या पति की मृत्यु के बाद बिताने वाली अवधि) की अवधि के बाद भी आजीवन (या दूसरी शादी होने तक) गुजारा भत्ता पाने का कानूनी अधिकार होगा। मुस्लिम परिवारों को अन्य नागरिकों की तरह कानूनी रूप से बच्चा गोद लेने का अधिकार और प्रक्रियागत मान्यता मिलेगी।

लिव इन पंजीकरण जरूरी होगा

यूसीसी के लागू होने के बाद मध्य प्रदेश में लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को एक महीने के भीतर रजिस्ट्रार के पास पंजीकरण कराना होगा। ऐसा न करने पर तीन महीने की जेल या 10 हजार जुर्माने का प्रविधान है।

लिव इन पंजीयन उसी सूरत में नहीं होगा, जहां कम से कम एक व्यक्ति विवाहित हो, पहले से ही लिव इन संबंध में हो, एक अवयस्क हो या जहां गलत पहचान बताई गई हो। जैविक, गोद लिए गए, सरोगेसी या एआरटी के जरिए जन्मे सभी बच्चों को समान कानूनी हक मिलेगा। अवैध संतान जैसे शब्दों को समाप्त किया जाएगा।

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