युद्ध और तबाही के साये में बकरीद… खतरनाक जंग के बीच गाजा में कैसे मनाया जाएगा त्योहार?…

भारत के साथ-साथ पूरी दुनिया में जहां भी मुसलमान हैं, वे बकरीद को लेकर काफी उत्साहित हैं।

लेकिन दुनिया का एक भाग ऐसा ही है, जो लगातार कई सालों से जंग की चपेट में है। वो जगह है- गाजा।

गाजा में जहां पहले के समय में बकरीद के मौके पर खुशियां सड़कों पर नजर आती थीं, वहीं उन खुशियों की जगह मायूसी ने ले ली है।

लोग ईद-उल-अजहा के मौके पर नमाज भी पढ़ेंगे, एक-दूसरे से गले भी मिलेंगे, लेकिन तबाही का मंजर इन खुशियों पर कुछ पाबंदी लगा देगा।

गाजा में कैसे मनाई जा रही बकरीद?

बकरीद के मौके पर जहां बाजारों की रौनक लोग होते हैं, लेकिन युद्ध के चलते बढ़ती महंगाई ने लोगों के खर्च करने की आदत को खत्म कर दिया है। गाजा में लाखों लोग टेंट में रह रहे हैं। माता-पिता अपने बच्चों की जरूरतें पूरी करने के लिए भी तरस रहे हैं।

न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, फिलिस्तीनी महिला नादिया अबू शमाला ने बताया, ‘वो बाजार तो जाती है, लेकिन वहां से कुछ खरीद नहीं सकती। उसने बताया कि जब भी वो किसी सामान की कीमत पूछती है तो उसका दिल टूट जाता है और वो अपने पैर पीछे खींच लेती है।’

गाजा में इमारतों से लेकर बाजार भी उजड़े पड़े हैं। लोगों ने टेबल लगाकर उस पर सामान रखा है। इन सभी बातों के बीच भी लोग केवल वही सामान खरीद रहे हैं, जो उनकी जरूरत है, लोगों ने अपनी ख्वाहिशों को डब्बे में पैक कर दिया है।

गाजा में भारी तबाही

संयुक्त राष्ट्र (United Nations) की रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध की वजह से गाजा की 80 फीसदी इमारतों को नुकसान पहुंचा है। इजरायल की नजर गाजा में आने-वाले हर सामान पर है, एक तरह से कहा जाए तो गाजा के हर आने-जाने वाले रास्ते पर गाजा का कंट्रोल है।

विदेशों से आने वाली मदद हो या निजी सामान से जुड़े ट्रक, इजरायल की इजाजत के बगैर गाजा में किसी भी वाहन या सामान की एंट्री बैन है, जिससे गाजा में महंगाई कम नहीं हो पा रही।

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