आमतौर पर जमीन में दफन किसी मृत मवेशी की खबर सुर्खियां नहीं बनती। लेकिन यूक्रेन का दावा है कि उसके रूसी कब्जे वाले क्षेत्रों में ऐसे सैकड़ों दफन स्थल बिखरे पड़े हैं, जिनमें से कई घातक एंथ्रेक्स बैक्टीरिया से संक्रमित हैं।
इनमें से कुछ स्थल लोगों के घरों, खेतों और पीने के पानी के कुओं से महज कुछ सौ मीटर की दूरी पर हैं।
यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय ने रूसी सेना पर इन स्थलों का जानबूझकर इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है, जिससे पुराने पशु कब्रिस्तानों को यूक्रेनी धरती के नीचे दबे दीर्घकालिक जैविक खतरों में बदला जा रहा है।
खेरसान क्षेत्र में सबसे ज्यादा खतरा
यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह समस्या मुख्य रूप से खेरसान क्षेत्र में केंद्रित है, जहां ऐसे लगभग 50 दफन स्थलों की पहचान की गई है। इनमें से करीब 10 को विशेष रूप से खतरनाक माना जा रहा है, जिनमें असकानिया-नोवा, स्कादोव्स्क और जालिज्नी पोर्ट के पास स्थित साइटें शामिल हैं।
यूक्रेनी रक्षा मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि खेरसान के अस्थायी रूप से कब्जे वाले क्षेत्र में, रूसी आक्रमणकारी जानबूझकर एंथ्रेक्स रोगजनक के प्रसार के लिए परिस्थितियां बना रहे हैं। यह कब्जे वाले क्षेत्र में एंथ्रेक्स से संक्रमित मवेशियों के शवों को दफन स्थलों तक ले जाने से जुड़ा गंभीर मामला है।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप
मंत्रालय का आरोप है कि रूसी सेना संक्रमित जानवरों के निस्तारण के दौरान बुनियादी सुरक्षा नियमों का पालन नहीं कर रही है। कीव का कहना है कि शवों को वैज्ञानिक तरीके से जलाने के बजाय उन्हें सड़कों और गांवों के पास बेहद खराब स्थिति में दफनाया जा रहा है। कुछ मामलों में तो रिहायशी घर इन खतरनाक स्थलों से एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर हैं।
यूक्रेन का यह भी कहना है कि इन कब्रिस्तानों में न तो उचित घेराबंदी है और न ही कोई सुरक्षात्मक दीवार। समय के साथ कब्रों के ऊपर की जमीन धंस रही है, लेकिन कब्जाधारी प्रशासन इन स्थलों को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी रखरखाव नहीं कर रहा है।
इसके अलावा, कुछ स्थल ऐसे क्षेत्रों में हैं जहां भूजल का स्तर काफी ऊंचा है। यूक्रेन ने चेतावनी दी है कि इससे एंथ्रेक्स का बैक्टीरिया पानी में फैल सकता है, जो मिट्टी में दशकों तक संभावित रूप से एक सदी तक जीवित रहने की क्षमता रखता है।
यूक्रेनी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि एंथ्रेक्स के प्रकोप के लिए जानबूझकर या लापरवाही से ऐसी परिस्थितियां पैदा करना आक्रामक देश रूस का एक और बड़ा अपराध है। इसे यूक्रेन के अस्थायी रूप से कब्जे वाले क्षेत्रों में नागरिक आबादी के खिलाफ जैविक आतंकवाद के कृत्य के रूप में देखा जा सकता है।
एंथ्रेक्स क्यों है इतना खतरनाक?
एंथ्रेक्स के बीजाणु बेहद सख्त और प्रतिरोधी होते हैं। ये जमीन के नीचे सैकड़ों-हजारों सालों तक जीवित रह सकते हैं, यही वजह है कि यूक्रेन को डर है कि युद्ध खत्म होने के लंबे समय बाद भी ये स्थल छिपे हुए जैविक हथियारों की तरह काम करते रहेंगे। यदि ये बीजाणु किसी नदी या जलाशय तक पहुंच जाते हैं, तो वे पानी में दो साल तक सक्रिय रह सकते हैं, जिससे महामारी तेजी से फैल सकती है।
एंथ्रेक्स पॉइजनिंग के लक्षण आमतौर पर शुरुआत में फ्लू जैसे होते हैं। लेकिन गंभीर मामलों में खून की उल्टी, सांस लेने में अत्यधिक तकलीफ, कई अंगों के फेल होने, सेप्टिक शॉक और रक्तस्रावी दिमागी बुखार का कारण बन सकता है।
रासायनिक हथियारों की आशंका
यूक्रेन ने इस दावे को उन पिछले आरोपों से भी जोड़ा है, जिनमें कहा गया था कि 2022 में पूर्ण पैमाने पर आक्रमण शुरू होने के बाद से रूसी सेना ने यूक्रेनी सैनिकों के खिलाफ 13,300 से अधिक बार अवैध रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया है।
मई में जारी एक बयान में यूक्रेन ने कहा था कि प्रतिबंधित रासायनिक युद्ध एजेंटों का उपयोग रूसी सेना द्वारा अपनाई जाने वाली एक व्यवस्थित युद्ध रणनीति बन गई है। आक्रमण की शुरुआत से अब तक दुश्मन द्वारा रासायनिक गोला-बारूद के इस्तेमाल के 13,300 से अधिक मामलों को आधिकारिक तौर पर दर्ज किया जा चुका है।
यूक्रेन का यह भी मानना है कि रूस इन मवेशी दफन स्थलों का इस्तेमाल किसी फॉल्स फ्लैग खुद हमला करके दूसरे पर मढ़ना यानी एक गुप्त विध्वंसक ऑपरेशन चलाने के लिए कर सकता है।
इसके पीछे एक दुष्प्रचार का पहलू भी हो सकता है, जिसके तहत रूस खुद यूक्रेन पर ही जैविक हथियार बनाने या उनका इस्तेमाल करने का झूठा आरोप लगाने की कोशिश कर सकता है। रूस ने अभी तक इन आरोपों पर अपनी कोई प्रतिक्रिया या टिप्पणी नहीं दी है।