राजस्थान विधानसभा में शुक्रवार को हंगामे और नारेबाजी के बीच समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पेश किया गया।
विधेयक पेश होने के बाद कांग्रेस विधायकों ने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया। इसके बाद सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।
विधेयक में सभी धर्मों के नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, संपति एवं विरासत के अधिकार और लिव-इन-रिलेशनशिप से जुड़े मामलों में एक समान कानूनी नियम लागू करने का प्रावधान किया गया है।
बहुविवाह पर रोक का भी प्रावधान किया गया है। संसदीय कार्यमंत्री जोगाराम पटेल ने सदन में विधेयक पेश किया। 309 पन्नों और 403 धाराओं वाले इस विधेयक में प्रावधान किया गया है कि किसी भी पक्ष के जीवित जीवनसाथी के होने पर दूसरा विवाह नहीं किया जा सकेगा।
विवाह के लिए पुरुषों के लिए न्यूनतम उम्र 21 और महिलाओं के लिए 18 वर्ष का प्रावधान किया गया है। विवाह का पंजीकरण 60 दिन के भीतर करवाना भी आवश्यक होगा। पंजीकरण नहीं करवाने पर दस हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
विधेयक के अनुसार, विवाह धार्मिक अथवा मान्य प्रथागत रीति-रिवाजों के अनुसार किया जा सकेगा, लेकिन पंजीकरण अनिवार्य होगा। विधेयक में लिव-इन-रिलेशनशिप का भी पंजीकरण करवाना अनिवार्य किया गया है।
लिव-इन-रिलेशनशिप से जन्मे बच्चों को दंपति की वैध संतान माना जाएगा। पिछले सप्ताह मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में विधेयक को पारित किया गया था।
मुस्लिम संगठनों ने यूसीसी के विरोध में धर्म सभा की विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश करने के विरोध में मुस्लिम समाज के लोगों ने शुक्रवार को जयपुर में धर्मसभा के बाद विधानसभा कूच किया, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उन्हें रास्ते में ही रोक लिया।
इस पर मुस्लिम समाज के लोगों ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। जयपुर के मोतीडूंगरी स्थित मुस्लिम मुसाफिर खाने में हुई धर्मसभा में वक्ताओं ने प्रस्तावित कानून को लेकर आपत्ति जताई।