ट्रंप की वीजा नीति से इन दो देशों पर पड़ा सबसे बड़ा असर, रिपोर्ट में बड़ा खुलासा…

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा अपनाई गई सख्त आव्रजन नीतियों का सबसे गहरा असर भारत और चीन पर पड़ा है।

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 के पहले आठ महीनों में 2024 की इसी अवधि की तुलना में लगभग 2.5 लाख कम वीजा जारी किए गए हैं।

अस्थायी वीजा में भारी गिरावट

विदेश विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से अगस्त 2025 के बीच स्थायी निवास और अस्थायी वीजा की संख्या में 11% की भारी गिरावट दर्ज की गई है।

छात्रों व कामगारों के आंकड़ों में भारी गिरावट रिपोर्ट के अनुसार, भारत और चीन के नागरिकों को मिलने वाले वीजा में लगभग 84 हजार की कमी आई है।

यह गिरावट मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय छात्रों और पेशेवर कामगारों के वर्ग में देखी गई है। आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2024 (जनवरी-अगस्त) में 3.44 लाख छात्र वीजा जारी हुए थे, जो 2025 में घटकर मात्र 2.38 लाख रह गए। यह 30 प्रतिशत से अधिक की गिरावट है।

फैमिली प्रेफरेंस वीजा का बुरा हाल

अमेरिकी नागरिकों के वयस्क बच्चों और भाई-बहनों को मिलने वाले ‘फैमिली प्रेफरेंस वीजा’ में 27% (44 हजार से अधिक) की कमी आई है। व्यापार और पर्यटन की श्रेणी में भी लगभग दो लाख वीजा कम जारी किए गए, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 3.4% की गिरावट दर्शाते हैं।

इसके अतिरिक्त, सांस्कृतिक विनिमय वीजा में 29,594 और मंगेतर/जीवनसाथी वीजा में भी 50% से अधिक की कमी (37,229 से घटकर 18,894) देखी गई है। ”सुरक्षा से समझौता नहीं”: प्रशासन का रुख ट्रंप प्रशासन ने इन फैसलों को ‘अमेरिका फ‌र्स्ट’ की नीति के तहत सही ठहराया है।

अमेरिका फ‌र्स्ट को प्राथमिकता

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता अबीगैल जैक्सन ने कहा, ”राष्ट्रपति ट्रंप को अमेरिकी नागरिकों को प्राथमिकता देने का स्पष्ट जनादेश मिला है और उनका हर फैसला इसी प्राथमिकता को दर्शाता है।” वहीं, विदेश विभाग के प्रवक्ता टामी पिगाट ने सख्त लहजे में कहा, ”वीजा एक विशेषाधिकार है, अधिकार नहीं।

पिछले प्रशासन के उलट, राष्ट्रपति ट्रंप बिना जांच वाले विदेशी नागरिकों को देश में आने देकर अमेरिकियों की सुरक्षा से समझौता करने को तैयार नहीं हैं।” विशेषज्ञों का मानना है कि इंटरनेट मीडिया चेक और विस्तृत जांच जैसे कड़े नियमों के कारण प्रशासनिक देरी बढ़ी है।

हालांकि, हार्वर्ड विश्वविद्यालय के जेसन फुरमान जैसे आलोचकों का तर्क है कि आव्रजन पर रोक लगाने से भविष्य में अमेरिका के नवाचार और आर्थिक विकास को नुकसान पहुंच सकता है।

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