
पश्चिम एशिया में ईरान के साथ जारी लंबे संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीति को लेकर खाड़ी के उनके सहयोगी देशों में बेचैनी बढ़ती जा रही है।
छह महीने से जारी युद्ध के बीच ईरान के साथ समझौते में देरी ने अमेरिका के क्षेत्रीय साझेदारों को चिंतित कर दिया है।
वाशिंगटन पोस्ट ने अरब और पश्चिमी अधिकारियों के हवाले से बताया कि इन देशों को आशंका है कि युद्ध खत्म कराने की कोशिश में ट्रंप प्रशासन संवेदनशील कूटनीति को गलत तरीके से संभाल सकता है, जिससे ईरान को फायदा मिल जाए।
सहयोगियों के बीच अब ट्रंप की इस जटिल स्थिति को संभालने की क्षमता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।हालांकि, व्हाइट हाउस ने इन आकलनों को खारिज करते हुए कहा है कि अमेरिका अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ लगातार संपर्क में है।
पिछले सप्ताह एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका ईरान के मुद्दे को फिलहाल ज्यादा तवज्जो नहीं दे रहा और नए सैन्य हमले की तैयारी भी नहीं कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा था कि ईरान के साथ मामूली स्तर पर बातचीत चल रही है और अमेरिका उसकी खराब होती आर्थिक स्थिति पर नजर रख रहा है।
होर्मुज को लेकर तेहरान की खुली चुनौती
इस बीच ईरानी सेना प्रमुख ने ट्रंप को सीधे चेतावनी दी है। अल जजीरा के अनुसार, सेना प्रमुख मेजर जनरल आमिर हातमी ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ट्रंप की टिप्पणियों का करारा जवाब दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि ईरान का मजाक उड़ाना अमेरिकी राष्ट्रपति को भारी पड़ेगा और ईरान अपने रणनीतिक समुद्री क्षेत्र में अमेरिकी मौजूदगी को स्वीकार नहीं करेगा।
एपी के अनुसार, ईरानी सेना ने अमेरिकी सैनिक को पकड़ने या मारने पर 30 हजार डॉलर के इनाम की घोषणा भी की है। ईरानी सेना प्रमुख के मुताबिक, अगर यह काम ईरानी महिलाएं करती हैं तो उन्हें दोगुना इनाम दिया जाएगा।
हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ ऐसा अभियान कब और कहां चलाया जाएगा। इस घोषणा को ट्रंप की उस चेतावनी से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने अमेरिकी सैनिकों को ईरान की जमीन पर उतारने की संभावना जताई थी।
विदेशी दखल पर ईरान में सख्ती
ईरानी संसद ने रविवार को एक ऐसे विधेयक के सामान्य सिद्धांतों को मंजूरी दी, जिसमें अमेरिकी या इजरायली मीडिया के साथ इंटरव्यू और बातचीत को अपराध की श्रेणी में रखा गया है।
रायटर के मुताबिक, विधेयक का उद्देश्य विदेशी खुफिया एजेंसियों के कथित हस्तक्षेप को रोकना है। कानून बनने के बाद ऐसे मीडिया से बातचीत करने पर छह महीने से दो साल तक की जेल हो सकती है।
पायलटों की तलाश को कतर-कुवैत से मदद मांगी
रायटर के अनुसार, ईरान ने कतर और कुवैत से अपने लापता सैन्यकर्मियों की तलाश के लिए जांच दल भेजने की अनुमति मांगी है। इनमें तीन लड़ाकू विमान पायलट और रिवोल्यूशनरी गार्ड नौसेना के चार सदस्य शामिल हैं।
ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, कतर में एक सैन्य पायलट का शव मिला था, जिसे ईरान को सौंप दिया गया। वहीं कुवैत के समुद्री क्षेत्र में पकड़े गए चार ईरानी नागरिकों को छोड़ने की भी तेहरान ने मांग की है।
फ्रांस को भी ईरान की चेतावनी
आईएएनएस के अनुसार, ईरान के खुफिया मंत्रालय ने फ्रांस को देश के आंतरिक मामलों में कथित हस्तक्षेप से दूर रहने की चेतावनी दी है।
मंत्रालय का आरोप है कि फ्रांसीसी राजनयिक जुलाई में तेहरान में विदेशी घुसपैठ से जुड़े मामले के संदिग्धों से गोपनीय बैठक में मिले थे। ईरान ने कहा है कि ऐसी गतिविधियां दोबारा हुईं तो उचित कार्रवाई की जाएगी।
10 दिन के दौरे के बाद लौटे सेंटकाम प्रमुख
एएनआइ के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने पश्चिम एशिया का 10 दिन का दौरा पूरा किया। उन्होंने 250 दिनों से समुद्र में तैनात विमानवाहक पोत अब्राहम लिंकन के नौसैनिकों की भी सराहना की।
लंबे समय से समुद्र में तैनाती के कारण चालक दल में मानसिक तनाव और उत्साह में कमी की खबरों के बीच युद्धपोत को जल्द अमेरिका रवाना किए जाने की तैयारी है।