अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) के अनुसार, जॉर्डन में एक बेस पर ईरानी हमले में भारतीय मूल की अमेरिकी सैनिक एंजेला रामप्रसाद के मारे जाने की आशंका है। रक्षा विभाग ने कहा कि 25 वर्षीय आर्मी सार्जेंट के बारे में माना जाता है कि 17 जुलाई, 2026 को जॉर्डन के मुवाफक साल्टी एयर बेस पर दुश्मन के हमले के दौरान उनकी मौत हो गई। साथ ही विभाग ने कहा कि घटना की जांच चल रही है।
बयान में कहा गया है कि पहले उन्हें लापता बताया गया था और बाद में उनकी स्थिति को ड्यूटी स्टेटस – ठिकाना अज्ञात और मृत माने जाने में बदल दिया गया।
रामप्रसाद गुयाना से आए भारतीय समुदाय से थीं, और उनके पिता की पहचान स्थानीय डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता बासदेव रामप्रसाद के रूप में हुई है। पेंटागन ने कहा कि वह न्यूयॉर्क शहर के क्वींस बरो के ओजोन पार्क इलाके की रहने वाली थीं, जहां भारतीय मूल के गुयानावासियों का एक बड़ा समुदाय रहता है।
जर्मनी के एन्सबाख में 10वीं आर्मी एयर एंड मिसाइल डिफेंस कमांड में तैनात रामप्रसाद जॉर्डन में ड्यूटी पर थीं, जब ईरान ने मुवाफक साल्टी एयर बेस पर ड्रोन से हमला किया।
डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता पेसाच ओसिना ने उन्हें लोगों के लिए सचमुच एक तोहफा बताया। उन्होंने कहा कि वह सेवा करना, दूसरों की रक्षा करना और साहस और विनम्रता के साथ अपना कर्तव्य निभाना चाहती थीं।
ओसिना ने X पर कहा कि इस त्रासदी के बाद से वह सार्जेंट के पिता बासदेव रामप्रसाद और उनकी मां कैरोल एसेवेडो सहित उनके परिवार के करीब हैं।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार के हमले में मारे गए अन्य अमेरिकी सेना के जवानों और उनके ऊपर हुए हमले का बदला लेने का संकल्प लिया है। उन्होंने बुधवार को कहा कि ईरान को इस हमले के लिए भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
इससे पहले उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा था, हर बार जब ईरान किसी अमेरिकी सैनिक को मारता है, तो उन्हें उस हत्या के लिए कई गुना कीमत चुकानी पड़ती है।
रामप्रसाद की अगर उनकी मौत की पुष्टि हो जाती है, तो वह बेस पर हुए हमले में मारी जाने वाली चौथी अमेरिकी सेना की सदस्य होंगी।