ईरान-इजरायल टकराव के बीच ट्रंप का दावा: सीजफायर बढ़ने की संभावना, परमाणु मुद्दे पर अड़े नेतन्याहू…

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ट्रुथ सोशल पर दावा किया कि ईरान के साथ सीजफायर विस्तार और शांति समझौते के बेहद करीब पहुंच गए हैं।

उन्होंने तीन प्रमुख प्रस्तावों, ईरान द्वारा परमाणु हथियार न बनाने की प्रतिबद्धता, हार्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी टोल या बाधा के खोलना और समुद्री खदानों को हटाने के आधार पर यह घोषणा की। हालांकि, इजरायल की तरफ से इस दावे पर ठंडा रवैया अपनाया गया है।

इजरायल ने क्या कहा?

इजरायली अधिकारी मानते हैं कि ईरान के परमाणु ठिकानों, हथियारों और क्षमता को पूरी तरह नष्ट किए बिना कोई भी समझौता पर्याप्त नहीं होगा। क्षेत्रीय शांति के लिए अमेरिका-ईरान के बीच चल रही वार्ता को इजरायल इसे अपर्याप्त बता रहा है।

इजरायली विदेश मंत्रालय के अधिकारियों का साफ तौर पर मानना है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर वो जरा सी भी असावधानी या ढीला रवैया सहन नहीं कर सकते क्योंकि वह इसे अपने अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा मानता है।

इजरायली अधिकारी ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी के पूर्व दावे की बार-बार याद दिला रहे हैं, जिसमें कहा गया था कि ईरान के पास 460 किलोग्राम 60 फीसद संवर्धित यूरेनियम है, जो लगभग 11 परमाणु बम बनाने के लिए पर्याप्त मात्रा है। अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकाफ ने मार्च 2026 में एक साक्षात्कार में बताया था कि ईरानी वार्ताकारों ने बातचीत में इस क्षमता की खुलकर चर्चा की थी।

क्या कहती है अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट?

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आइएईएए) के प्रमुख राफेल ग्रासी ने हाल ही में कहा है कि ईरान का संवर्धन कार्यक्रम हालिया हमलों से क्षतिग्रस्त तो हुआ है, लेकिन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट्स भी बताती हैं कि ईरान वर्ष 2003 में परमाणु हथियार कार्यक्रम रोक चुका है लेकिन उसका 60 फीसद संवर्धित यूरेनियम स्टाक मात्र एक हफ्ते में हथियार-ग्रेड स्तर पर पहुंच सकता है।

इन दावों का उल्लेख करते हुए इजरायली अधिकारी कहते हैं कि हमलों के बावजूद ईरान की गुप्त क्षमता बनी हुई है, जो पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।इजरायली मीडिया और थिंक टैंक ईरान की परमाणु क्षमता को लगातार हवा दे रहे हैं, जो प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू के लिए राजनीतिक मुश्किल खड़ी कर रहा है।

जेरूसलम पोस्ट ने लिखा है, “इतिहास गवाह है कि इस शासन (ईरान) के लिए कोई समझौता प्रतिबद्धता नहीं, बल्कि मात्र धोखे का पर्दा है। हमें यह पूछना बंद कर देना चाहिए कि क्या उनके पास परमाणु हथियार का इस्तेमाल न करने के लिए पर्याप्त ‘तर्क’ हैं, इसका जवाब उनके अपने इतिहास में ही छिपा है।”

“एक ऐसा शासन, जो नागरिक अशांति के दौरान मात्र कुछ दिनों में अपने ही 40,000 से अधिक निरस्त्र नागरिकों का सैन्य हथियारों से नरसंहार करने में सक्षम है, वह यदि परमाणु हथियार व उन्हें पहुंचाने वाले लंबी दूरी की मिसाइलें (आईसीबीएम) हासिल कर ले तो अमेरिका और इजरायल पर परमाणु ट्रिगर खींचने में एक पल भी नहीं हिचकेगा।”

मीडिया का यह रुख नेतान्याहू के लिए बड़ी चुनौती बन गया है, जो आगामी आम चुनाव की तैयारी में जुटे हुए हैं। इजरायल में ईरान की परमाणु बम बनाने की क्षमता अब प्रमुख चुनावी मुद्दा बन चुकी है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि युद्ध के बावजूद ईरान का कार्यक्रम पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ, जो नेतान्याहू की सुरक्षा नीति और विरासत पर सवाल उठाता है।

थिंक टैंक की चेतावनी

दूसरी तरफ थिंक टैंक चेतावनी दे रहे हैं कि कोई भी समझौता ईरान को सांस लेने का मौका देगा और भविष्य में बड़े खतरे को निमंत्रण देगा।ईरान में स्थिति अभी भी जटिल बनी हुई है। युद्ध और इजरायली हमलों से अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है, लेकिन शासन व्यवस्था मजबूत दिख रही है।

शनिवार को ईरानी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कहा है कि जब तक हार्मुज जलमार्ग पर अमेरिकी नाकेबंदी पूरी तरह खत्म नहीं हो जाती, तब तक ईरान अपनी तरफ से होर्मुज में आवाजाही की इजाजत नहीं देगा। ईरान होर्मुज खोलने और यूरेनियम स्टाक नष्ट करने से इनकार कर रहा है। इसके बजाय वह प्रतिबंधों को पूरी तरह से हटाने, लेबनान में इजरायली कार्रवाई रोकने और क्षेत्रीय संप्रभुता के सम्मान की मांग कर रहा है।

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