मिडिल ईस्ट में मारे गए अमेरिकी सैनिकों को ट्रंप ने दी अंतिम विदाई, ईरान को नेस्तनाबूद करने की चेतावनी दी…

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई। जिसके बाद ईरान ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की।

ईरान ने इजरायल, बहरीन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन सहित पूरे खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और सहयोगियों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया।

ईरान द्वारा किए गए ड्रोन और मिसाइल हमले में 6 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई। शनिवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप डेलावेयर के डोवर वायु सेना अड्डे पर ईरान के हमले में मारे गए छह अमेरिकी सैनिकों की अंतिम विदाई में शामिल हुए।

अमेरिकी सैनिकों के सम्मानपूर्वक विदाई में ट्रंप के अलावा उपराष्ट्रपति जेडी वैंस और युद्ध सचिव पीट हेगसेथ, अटॉर्नी जनरल पाम बोंडी, सेना सचिव डैन ड्रिस्कॉल सहित कई शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे।

ईरानी हमले में मारे गए थे अमेरिकी सैनिक

द हिल की रिपोर्ट के अनुसार, 1 मार्च को शुएबा बंदरगाह पर एक अस्थायी कार्यालय में सैनिक मौजूद थे, तभी बिना किसी पूर्व सूचना के ईरानी ड्रोन ने उन पर हमला कर दिया।

इस हमले में अमेरिकी सैनिक मेजर जेफरी आर. ओ’ब्रायन, कैप्टन कोडी ए. खोरक, चीफ वारंट ऑफिसर 3 रॉबर्ट एम. मार्जन, सार्जेंट फर्स्ट क्लास निकोल एम. अमोर, सार्जेंट फर्स्ट क्लास नोआ एल. टिटजेंस और सार्जेंट डेक्लान जे. कोडी मारे गए थे।

शुक्रवार को अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने कहा कि उनकी मृत्यु व्यर्थ नहीं जाएगी। उन्होंने लिखा, “हम कार्रवाई से उन्हें श्रद्धांजलि देंगे। हम जिम्मेदार ईरानी कट्टरपंथियों का पता लगाएंगे, उनकी सैन्य क्षमताओं को नष्ट करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि न्याय त्वरित और पूर्ण हो।”

आत्मसमर्पण कर दें या फिर…

इसी बीच, एयर फोर्स वन में ट्रंप ने ईरान के खिलाफ की गई कार्रवाई के बारे में जानकारी देते हुए कहा, “हम ईरान के नेतृत्व को कई बार खत्म कर चुके हैं। बात सिर्फ इतनी है कि या तो वे आत्मसमर्पण कर दें या फिर आत्मसमर्पण करने के लिए कोई बचे ही न, लेकिन सैन्य दृष्टि से वे पूरी तरह बेकार हो चुके हैं।”

ईरान की स्थिति भी कुछ खास अच्छी नहीं

वहीं, जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या रूस ईरान का समर्थन कर रहा है, तो उन्होंने कहा, “मेरे पास इसका कोई संकेत नहीं है। अगर वे ऐसा कर रहे हैं, तो वे अच्छा काम नहीं कर रहे हैं क्योंकि ईरान की स्थिति भी कुछ खास अच्छी नहीं है।”

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