ग्रीन कार्ड नियमों पर ट्रंप प्रशासन का यू-टर्न, उद्योग जगत के दबाव के बाद बदला रुख…

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां उनके ही देश के बिजनेस के लिए भारी पड़ रही हैं। हाल ही में ट्रंप प्रशासन ने घोषणा की थी कि ज्यादातर ग्रीन कार्ड आवेदकों को अपने देश लौटना होगा। USCIS की घोषणा के बाद ही अमेरिका के बिजनेस लीडर्स ने अधिकारियों को निजी तौर पर चेतावनी कि ऐसी नीति से उनके वर्कफोर्स को नुकसान पहुंचेगा।

USCIS ने कहा था कि परमानेंट स्टेटस के लिए आवेदन करने वालों को अपने देश से ही आवेदन करना चाहिए। हालांकि, उन्होंने इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी कि इससे कौन प्रभावित होगा, जिससे लाखों लोग अनिश्चितता की स्थिति में आ गए।

रिपोर्ट के अनुसार, घोषणा के बाद व्हाइट हाउस और होमलैंड सिक्योरिटी, लेबर और स्टेट विभागों के साथ बिजनेस, इंडस्ट्री ग्रुप और CEO के बीच कॉल और ईमेल के जरिए बातचीत हुई। टेक इंडस्ट्री और US चैंबर ऑफ़ कॉमर्स ने व्हाइट हाउस के सामने ये मुद्दे उठाए।

प्रतिभाएं खोने का डर

टेक दिग्गजों और उद्योगपतियों का तर्क था कि कुशल प्रवासियों को जबरन वापस भेजने से अमेरिकी तकनीकी उद्योग और नवाचार (Innovation) को अपूरणीय क्षति पहुंचेगी।

बिजनेस लीडर्स और इमीग्रेशन विशेषज्ञों ने आगाह किया कि इस नियम के कारण कंपनियों को अपनी सबसे बेहतरीन प्रतिभाओं से हाथ धोना पड़ सकता है, जिससे न केवल आर्थिक अस्थिरता पैदा होगी, बल्कि वैश्विक बाजार में अमेरिका की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी कमजोर होगी।

नरम हुआ ट्रंप का रुख

दिग्गज कंपनियों के चौतरफा दबाव, कानूनी विशेषज्ञों की आपत्तियों और सांसदों के कड़े विरोध के बाद आखिरकार अमेरिकी प्रशासन को झुकना पड़ा। पिछले हफ़्ते, ट्रंप प्रशासन ने बिजनेस लीडर्स को भरोसा दिलाया कि ज़्यादातर वर्क वीजा पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

USCIS ने पत्रकारों को बताया कि परमानेंट रेजिडेंसी चाहने वाले ज़्यादातर विदेशी विजिटर्स को अपने देश वापस नहीं जाना पड़ेगा, लेकिन अधिकारियों की तरफ से अभी तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।

इमिग्रेशन वकीलों ने वॉशिंगटन पोस्ट को बताया कि ग्रीन कार्ड की सख्त पॉलिसी को तब तक रोक दिया गया है, जब तक कि इमिग्रेशन अधिकारियों को इसे लागू करने के तरीके के बारे में और जानकारी नहीं मिल जाती।

प्रशासन के इस फैसले से उन लाखों पेशेवरों और उनके परिवारों ने बड़ी राहत की सांस ली है, जिनकी नौकरियां और भविष्य इस अनिश्चित नीति के कारण दांव पर लग गए थे।

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