तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न ‘घासफूल’ को लेकर नया विवाद सामने आया है।
वरिष्ठ कलाकार सोमनाथ चौधरी ने दावा किया है कि पार्टी के चर्चित प्रतीक का मूल डिजाइन उन्होंने तैयार किया था, लेकिन इसका श्रेय बाद में ममता बनर्जी ने अपने नाम कर लिया।
बंगाल की सत्ता से तृणमूल कांग्रेस के बाहर होने के बाद अब कलाकार ने सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी है।
सोमनाथ चौधरी पेशे से कलाकार हैं और एक समय कांग्रेस की छात्र राजनीति से जुड़े थे। उनका कहना है कि वर्ष 1998 में उन्हें तत्कालीन केंद्रीय मंत्री अजीत पांजा ने एक नए राजनीतिक दल के लिए प्रतीक तैयार करने की जिम्मेदारी दी थी। हालांकि उस समय उन्हें यह नहीं बताया गया था कि यह प्रतीक बनने वाली नई पार्टी तृणमूल कांग्रेस का होगा।
कलाकार के अनुसार, उन्होंने ‘घासफूल’ का डिजाइन तैयार किया, लेकिन पार्टी गठन के पहले ही दिन टेलीविजन पर उन्होंने देखा कि ममता बनर्जी स्वयं इस प्रतीक को अपनी रचना बता रही हैं। सोमनाथ का आरोप है कि उनकी कला और योगदान को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।
विरोध करने पर गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते थे
उन्होंने यह भी दावा किया कि उस समय विरोध या सच्चाई सामने लाने की हिम्मत वह नहीं जुटा सके। उनके मुताबिक, अगर वह इस मुद्दे पर मुखर होते तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते थे। इसी कारण वह वर्षों तक चुप रहे।
उल्लेखनीय है कि एक जनवरी 1998 को ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस का गठन हुआ था। लंबे आंदोलन, धरना और राजनीतिक संघर्ष के बाद पार्टी ने बंगाल की राजनीति में मजबूत जगह बनाई और 2011 में सत्ता में आई। करीब 15 वर्षों तक शासन करने के बाद पार्टी को हाल में सत्ता से बाहर होना पड़ा।