हजारों आशियानों को उजड़ने से राहत मिली है। इंदौर मेट्रो स्टेशन अब अंडरग्राउंड बनेगा, जिससे रानी सराय के हरे-भरे पेड़ सुरक्षित रहेंगे…

शहरवासियों के लिए राहत भरी खबर है कि मेट्रो स्टेशन के नाम पर रानी सराय में लगे सैंकड़ों हरे-भरे पेड़ यथावत बने रहेंगे। इन्हें न तो काटा जा सकेगा न ही इनका ट्रांसप्लांट होगा।

ऐसा इसलिए क्योंकि हाई कोर्ट ने इस संबंध में प्रस्तुत जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए पेड़ों को काटने या इनके ट्रांसप्लांट पर रोक लगा दी है। हजारों परिंदे इन पेड़ों पर घरोंदा बनाकर रह रहे हैं।

जनहित याचिका में कहा है कि अगर पेड़ों को काटा गया तो हजारों परिंदों पर संकट आ जाएगा। सुनवाई के दौरान शासन की ओर से सरकारी वकील ने कहा कि पेड़ काटने की योजना नहीं है क्योंकि रानी सराय में अंडर ग्राउंड मेट्रो स्टेशन बनाया जाना है। इस पर कोर्ट ने कहा कि यह बात लिखित में दें।

इस आदेश के बाद रानी सराय परिसर की हरियाली यथावत बने रहने की संभावना बढ़ गई है। पिछले कई दिनों से पर्यावरणविद रानी सराय परिसर की हरियाली बचाने के लिए आंदोलन कर रहे हैं।

हाई कोर्ट में यह जनहित याचिका प्रियांशु जैन ने एडवोकेट लवेश सारस्वत के माध्यम से प्रस्तुत की है। इसमें कहा है कि रानी सराय परिसर में सैंकड़ों की संख्या में पेड़ हैं। इन पेड़ों पर हजारों परिंदे घरोंदा बनाकर रह रहे हैं। इनमें कई दुर्लभ प्रजाति के पक्षी भी शामिल हैं।

मेट्रो कॉर्पोरेशन ने मेट्रो स्टेशन के नाम पर इन पेड़ों को काटने की तैयारी कर ली है। ऐसा किया जाता है तो हजारों परिंदों का जीवन संकट में पड़ जाएगा। यह वन संरक्षण अधिनियम 1980 और पर्यावरण अधिनियम 1986 की उलंघन है।

मेट्रो कॉर्पोरेशन ने पेड़ों को काटने के लिए नगर निगम से किसी तरह की अनुमति भी नहीं ली है। 9 जनवरी 2026 को नगर निगम के उद्यान अधिकारी ने नोटिस जारी कर कहा है कि मेट्रो कार्पोरेशन ने पेड़ काटने के लिए किसी तरह का आवेदन ही नहीं दिया है।

शुक्रवार को न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगलपीठ के समक्ष याचिका में सुनवाई हुई। एडवोकेट सारस्वत ने बताया कि कोर्ट ने रानी सराय परिसर स्थित पेड़ों को काटने या इनके ट्रांसप्लांट पर रोक लगाते हुए शासन और संबंधित पक्षकारों से लिखित में जवाब मांगा है। मामले में अगली सुनवाई 16 फरवरी को होगी।

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