सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को पूरी तरह से लागू करने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जवाब मांगा है।
प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्य बागची की पीठ ने यह कदम हरिप्रिया पटेल द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए उठाया।
याचिका में मांग की गई है कि छह से 14 वर्ष के बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के कानून को कड़ाई से लागू किया जाए और साथ ही पूरे देश में नई शिक्षा नीति के प्रविधानों को प्रभावी बनाया जाए।
याचिकाकर्ता का क्या कहना है?
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने देशभर में प्री-प्राइमरी शिक्षा (पूर्व-प्राथमिक शिक्षा) की अनिवार्यता और उसे लागू करने की कानूनी स्थिति पर जोर दिया।
वर्तमान में आरटीई कानून मुख्य रूप से छह से 14 वर्ष के बच्चों पर केंद्रित है, लेकिन याचिकाकर्ता का तर्क है कि बच्चों के विकास के शुरुआती साल भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं और इनके लिए एक मानक कानूनी ढांचा होना अनिवार्य है।
इसके अलावा, याचिका में एनईपी 2020 के पूर्ण कार्यान्वयन की भी मांग की गई है। दशकों पुराने 10+2 के ढांचे को बदलकर 5+3+3+4 मॉडल (3-18 वर्ष) लाने वाली यह नीति, कौशल विकास और लचीली शिक्षा पर आधारित है।
याचिका में कहा गया है कि कक्षा छह से व्यावसायिक प्रशिक्षण, एआई , कोडिंग और बहुभाषावाद जैसे आधुनिक विषयों का लाभ देश के हर हिस्से के छात्रों को मिलना चाहिए।
कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए कहा कि वह इन प्रविधानों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करना चाहता है। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, हम नोटिस जारी कर रहे हैं। हम इस मामले की जांच करना चाहते हैं।