ब्रिटेन में कब्रिस्तानों में जगह की कमी, 100 साल पुरानी कब्रों का दोबारा किया जाएगा इस्तेमाल…

इंग्लैंड और वेल्स में कब्रिस्तान में जगह की भारी कमी हो गई है। शहरों में तो हालात और भी खराब हैं। अब लॉ कमीशन ने 170 साल से ज्यादा पुराने कानूनों को आधुनिक बनाने की सिफारिश की है, ताकि पुरानी कब्रों को दोबारा इस्तेमाल किया जा सके और बंद कब्रिस्तानों को फिर से खोला जा सके।

कमीशन की रिपोर्ट में कहा गया है कि ये बदलाव आज की चुनौतियों खासकर कब्रों की कमी का सीधा जवाब हैं।

पुरानी कब्रों का दोबारा इस्तेमाल

लंदन के काउंसिल कब्रिस्तानों, चर्च ऑफ इंग्लैंड के चर्चयार्ड्स और कुछ खास कब्रिस्तानों में पुरानी कब्रों का दोबारा इस्तेमाल की अनुमति है। लॉ कमीशन अब इस सुविधा को इंग्लैंड और वेल्स के सभी कब्रिस्तानों तक बढ़ाने की सिफारिश कर रहा है।

आखिरी दफन के 100 साल बाद ही कब्र दोबारा इस्तेमाल हो सकेगी, वर्तमान में कई जगह 75 साल की सीमा है। परिवार के सदस्यों को आपत्ति जताने के लिए 1 साल का समय मिलेगा। आपत्ति होने पर कब्र अगले 25 साल तक दोबारा इस्तेमाल नहीं होगी।

सिर्फ कंकाल बचे होने पर को गहराई में डालकर नई कब्र ऊपर बनाई जा सकेगी। हर कब्र के ऊपर कम से कम 2 फीट मिट्टी की परत अनिवार्य होगी, यह कई जगहों पर अब तक नहीं है।

युद्ध के सैनिकों की कब्रें रहेंगी सुरक्षित

पहले विश्व युद्ध और द्वितीय विश्व युद्ध में शहीद सैनिकों की कब्रों को छेड़ने की चिंता थी। कमीशन ने स्पष्ट किया कि कॉमनवेल्थ वॉर ग्रेव्स कमीशन (सीडब्ल्यूजीसी) को हमेशा आपत्ति का अधिकार रहेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि हमारे सुझावों से कभी भी कोई कॉमनवेल्थ वॉर ग्रेव दोबारा इस्तेमाल नहीं होगी।

इसके अलावा, मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस के दायरे में आने वाली पोस्ट-वॉर मिलिट्री कब्रों को भी आपत्ति का अधिकार देकर सुरक्षित किया जाएगा।

फिर खुलेंगे विक्टोरियन युग के बंद कब्रिस्तान 

विक्टोरियन काल में कई कब्रिस्तान फुल घोषित कर बंद कर दिए गए थे। अब इन्हें फिर से खोलने का रास्ता साफ होगा। इससे स्थानीय पैरिश चर्चयार्ड्स में भी दफन की सुविधा वापस आ सकती है।

कमीशन का कहना है कि पुराने कानून जटिल और पुराने हो चुके हैं, जो आज की जरूरतों के अनुरूप नहीं हैं।

रिपोर्ट में नेशनल एसोसिएशन ऑफ फ्यूनरल डायरेक्टर्स की चिंता का भी जिक्र है। यूके में करीब 3 लाख सेट अनक्लेम्ड ऐशेज (अस्थियां) फ्यूनरल होम्स की अलमारियों पर पड़ी हैं। परिवार के झगड़े, बीमारी या अन्य कारणों से लोग इन्हें लेने नहीं आते।

ये है नए प्रस्ताव

  • 6 महीने तक संपर्क करने की कोशिश के बाद एशेज को क्रेमेशन अथॉरिटी को लौटाया जा सकेगा।
  • क्रेमेशन अथॉरिटी को इन्हें स्वीकार करना अनिवार्य होगा।
  • फ्यूनरल डायरेक्टर से सरकार तय शुल्क लिया जा सकता है।

सरकार क्या कह रही है?

मिनिस्ट्री ऑफ जस्टिस के प्रवक्ता ने कहा कि सरकार लॉ कमीशन की रिपोर्ट की सिफारिशों पर गौर करेगी और समय आने पर औपचारिक जवाब देगी।

ये बदलाव अभी प्रस्ताव हैं। जनता, विशेषज्ञों और डेथ केयर सेक्टर से राय ली जा रही है। अंतिम सिफारिशें 2025 के अंत या 2026 की शुरुआत में सरकार को सौंपी जाएंगी।

प्रोफेसर लिसा वेबली, कमीशन की प्रॉपर्टी, फैमिली एंड ट्रस्ट लॉ कमिश्नर ने कहा कि ये सिफारिशें आधुनिक चुनौतियों का सीधा समाधान हैं और पुराने कानूनों की जटिलताओं को दूर करेंगी।

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