जलवायु परिवर्तन को लेकर एक नई स्टडी ने गंभीर चेतावनी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन इसी तरह जारी रहा, तो साल 2100 तक दुनिया के करीब एक-तिहाई हिस्से को ज्यादा भीषण हीटवेव (लू) और सूखे का सामना करना पड़ सकता है।
शोध में पाया गया है कि बढ़ते तापमान के कारण कई क्षेत्रों में अत्यधिक गर्मी और पानी की कमी एक साथ देखने को मिलेगी।
यह स्थिति खासतौर पर उन इलाकों में ज्यादा खतरनाक होगी, जहां पहले से ही जल संसाधन सीमित हैं।
हीटवेव और सूखे का डबल खतरा
स्टडी के मुताबिक, एशिया, अफ्रीका और कुछ हिस्सों में यह खतरा सबसे ज्यादा होगा। इन क्षेत्रों में रहने वाली बड़ी आबादी सीधे तौर पर प्रभावित हो सकती है।
लगातार बढ़ती गर्मी से फसल उत्पादन पर असर पड़ेगा।
पानी की कमी से पीने के पानी और कृषि दोनों पर संकट गहराएगा। इससे खाद्य सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर भी असर पड़ सकता है।
क्या है कोई समाधान?
विशेषज्ञों का कहना है कि इस खतरे को कम करने के लिए ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में तेजी से कटौती जरूरी है।
जल प्रबंधन और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाना होगा। नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ाना होगा।
स्टडी में यह भी कहा गया है कि अगर दुनिया समय रहते कदम उठाए, तो इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।