दुनिया बनती जा रही नरक, UN बेकार साबित; डोनाल्ड ट्रंप ने लगाई जमकर फटकार…

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी बेबाकी के लिए जाने जाते हैं और अकसर अपने बयानों से चौंका देते हैं। ऐसा ही संयुक्त राष्ट्र संघ के मंच पर भी हुआ।

उन्होंने यूएन के मंच से ही वैश्विक संस्था को जमकर लताड़ा और कहा कि यह तो किसी काम का ही नहीं है। उन्होंने कहा कि मैंने दुनिया भर में 7 जंग रुकवा दीं, लेकिन यूएन की ओर से मुझे एक फोन तक नहीं किया गया।

कोई योगदान करना तो दूर की ही बात है। इस तरह डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से 7 जंग रुकवाने का क्रेडिट लिया तो वहीं यूएन की विश्वसनीयता पर ही सवाल उठा दिए।

इसके अलावा उन्होंने क्लाइमेट चेंज को लेकर कोई ऐक्शन ना लेने और तमाम देशों में प्रवासियों के बढ़ते जाने पर भी चिंता जताई।

उन्होंने कई देशों के नेताओं को नसीहत देते हुए कहा कि आपकी इमिग्रेशन पॉलिसी ऐसी है कि तेजी से प्रवासी बढ़ रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि दुनिया तेजी से नरक बनती जा रही है।

अपने 56 मिनट के भाषण में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मैं तो शांति स्थापित कराने वाला नेता हूं। उन्होंने कहा कि मेरी ओर से 7 जंगें रुकवा दी गईं, लेकिन संयुक्त राष्ट्र की ओर से तो इसमें कोई सहयोग नहीं मिला।

उन्होंने कहा कि हमारे प्रयासों पर कभी भी यूएन ने साथ नहीं दिया। मुझे तो धन्यवाद कहने के लिए भी एक कॉल तक नहीं आई।

इस तरह ट्रंप ने खुलकर तो नहीं कहा, लेकिन युद्ध रुकवाने के नाम पर एक बार फिर से नोबेल सम्मान के लिए इच्छा जाहिर कर दी।

ट्रंप ने सीधा सवाल दागा कि आखिर संयुक्त राष्ट्र का उद्देश्य क्या है। हालांकि अपने भाषण के बाद संयुक्त राष्ट्र महासचिव के साथ मुलाकात में ट्रंप ने नरम रुख दिखाया और कहा, ‘हमारा देश संयुक्त राष्ट्र के साथ 100 प्रतिशत है… मैं कभी-कभी असहमत हो सकता हूं, लेकिन मैं इसका पूरा समर्थन करता हूं।’

भाषण के दौरान ट्रंप ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के उपायों को ‘धोखा’ बताया और नवीकरणीय ऊर्जा को ‘मजाक’ कहकर खारिज किया। उन्होंने कहा, ‘कार्बन फुटप्रिंट एक षड्यंत्र है, जिसे बुरी नीयत वाले लोग बना रहे हैं, और वे विनाश की राह पर जा रहे हैं।’

‘पश्चिम यूरोप के देश खुद बुला रहे अपनी मौत’

ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने नए तेल, गैस और कोयले के भंडारों की खोज के लिए बड़े पैमाने पर प्रयास किए हैं। प्रवासन नीति पर ट्रंप ने कहा कि पश्चिमी यूरोप की ऊर्जा और प्रवासन नीतियां ‘आत्मघाती’ हैं और यही उनकी ‘मृत्यु’ का कारण बनेंगी।

उन्होंने अमेरिकी आव्रजन सख्ती को अन्य देशों के लिए उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया। ट्रंप ने नाटो सहयोगियों की भी आलोचना की कि वे रूसी तेल की खरीद बंद नहीं कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘वे अपने ही खिलाफ युद्ध को फंड कर रहे हैं। अगर रूस युद्ध समाप्त करने के लिए तैयार नहीं है, तो अमेरिका शक्तिशाली टैरिफ लगाने के लिए तैयार है।’

ट्रंप बोले- दो चीजें मुझे यहां मिलीं, एक खराब एस्केलेटर और टेलीप्रॉम्पटर

राष्ट्रपति ट्रंप के इन बयानों पर वैज्ञानिकों और विश्व नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी। यूनियन ऑफ कंसर्न्ड साइंटिस्ट्स की रेचेल क्लीटस ने कहा, ‘राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी सरकार जलवायु विज्ञान और स्वच्छ ऊर्जा के फायदों के बारे में झूठ और गलत जानकारी फैला रहे हैं, जो अमेरिकी जनता के लिए गंभीर नुकसान है।’

इस भाषण के दौरान एक हल्का पल भी आया, जब ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र के एस्केलेटर और टेलीप्रॉम्प्टर की खराबी पर मजाक किया।

उन्होंने कहा, ‘संयुक्त राष्ट्र से मुझे दो चीजें मिलीं—एक खराब एस्केलेटर और एक खराब टेलीप्रॉम्प्टर।’ इस पर UNGA अध्यक्ष ने जवाब दिया कि ‘संयुक्त राष्ट्र के टेलीप्रॉम्प्टर बिल्कुल ठीक काम कर रहे हैं।’

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