करीब 49 दिनों बाद होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुल गया है, हालांकि अमेरिकी नाकेबंदी अब भी जारी है। इसके बावजूद भारत सहित पूरी दुनिया को बड़ी राहत मिली है…

पश्चिम एशिया संघर्ष की वजह से पिछले 49 दिनों से जहाजों के आवागमन के लिए बंद होर्मुज जल मार्ग के खुलने का रास्ता साफ हो गया है।

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्ति को लेकर चल रहे विमर्श के बीच में शुक्रवार को ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से सभी व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही पूरी तरह खोलने की औपचारिक घोषणा कर दी है।

ईरान की घोषणा का पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि, “होर्मुज जलडमरूमध्य अब पूरी तरह खुल गया है और कारोबार तथा आवागमन के लिए तैयार है। लेकिन अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी पूर्ण ताकत के साथ जारी रहेगी।

कब तक रहेगी नाकाबंदी?

यह नाकेबंदी तब तक बनी रहेगी, जब तक ईरान के साथ अमेरिका का लेन-देन सौ फीसदी पूरा नहीं हो जाता”। ट्रंप ने यह भी कहा कि ज्यादातर मुद्दों पर विमर्श पूरा हो चुका है, इसलिए यह प्रक्रिया जल्द ही पूरी हो जाएगी।ट्रंप ने ईरान के साथ मिल कर होर्मुज में बिछाये गये समुद्री बारूदी विस्फोटकों को हटाने की भी घोषणा की है।

इसके साथ ही भारत समेत दुनिया के उन सभी देशों ने राहत की सांस ली है जो अपनी ऊर्जा जरूरत के लिए होर्मुज जल मार्ग पर आश्रित थे।

28 फरवरी, 2026 को ईरान पर इजरायल व अमेरिका के संयुक्त हमले के बाद ईरान ने होर्मुज में जहाजों का आवागमन बंद कर दिया था, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई।

भारत तो अपनी कच्चे तेल आयात का 60 फीसद और एलपीजी आयात का 90 फीसद इसी मार्ग से लेता रहा है जो संघर्ष की वजह से काफी सीमित हो गया था। भारतीय शेयर बाजार में भारी अस्थिरता रही और रुपये की कीमत में भी काफी गिरावट दर्ज की गई। इससे वैश्विक इकोनमी के गहरे मंदी में जाने का खतरा पैदा हो गया था। अब खतरा टल गया है।

खुल गया होर्मुज

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने पहले सोशल मीडिया पर लिखा कि, “लेबनान में हुए सीजफायर के अनुरूप, होर्मुज जलडमरूमध्य से सभी व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही शेष सीजफायर अवधि के लिए पूरी तरह खुली घोषित की जाती है। यह आवाजाही पो‌र्ट्स एंड मैरिटाइम आर्गेनाइजेशन ऑफ द इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान द्वारा पहले से घोषित समन्वित मार्ग पर होगी।”

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इस घोषणा की तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “ईरान ने अभी-अभी घोषणा की है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुल गया है और पूर्ण आवाजाही के लिए तैयार है। धन्यवाद।”ईरान ने शुरुआत में होर्मुज को अमेरिका, इजराइल और उनके सहयोगी देशों के जहाजों के लिए बंद करने की घोषणा की थी लेकिन वहां के हालात ऐसे थे कि भारत, चीन जैसे मित्र देशों के जहाजों को निकालना भी आसान नहीं था।

होर्मुज का बंद होना भारत की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन कर उभरा है। विश्व का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश होने के नाते भारत की लगभग 80-85 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति इस मार्ग से होती है। इस अवधि में देश में ऊर्जा संकट उत्पन्न हो गया, जिससे पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और एलएनजी की उपलब्धता और कीमतों पर दबाव पड़ा।

सरकार ने घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में कोई वृद्धि नहीं होने दी लेकिन यह भी बताया गया कि सरकारी तेल कंपनियां पेट्रोल 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल 103 रुपये प्रति लीटर घाटे पर बेच रही हैं। शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स और निफ्टी में तेज मंदी देखी गई।

28 फरवरी से 17 मार्च के बीच डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया काफी कमजोर हुआ, जिससे आयात बिल बढ़ा और विदेशी मुद्रा भंडार पर अतिरिक्त दबाव पड़ा। आरबीआइ को वर्ष 2026-27 के लिए विकास दर के अनुमान को कम करना पड़ा है।एलपीजी की किल्लत की वजह से शहरों से मजदूरों के पलायन की भी सूचना है।

होर्मुज के खुलने की घोषणा के साथ ही भारत की सबसे बड़ी प्राथमिकता वहां फंसे अपने 15 जहाजों को बाहर निकालने की है। संघर्ष की शुरुआत में वहां 24 जहाज फंसे हुए थे। ईरान के साथ विमर्श करके सरकार ने नौ जहाजों को बाहर निकालने में सफल रही। लेकिन पिछले चार दिनों के दौरान होर्मुज से एक भी भारतीय जहाज बाहर नहीं निकला है।

भारत को फायदा

इन जहाजों में एलपीजी, एलएनजी व कच्चा तेल है, जिसकी भारत को सख्त जरूरत है। साथ ही होर्मुज में फंसे जहाजों में सैकडों भारतीय नाविक भी हैं। ये नाविक ना सिर्फ भारतीय जहाजों में हैं बल्कि दूसरे देशों के जहाजों में भी हैं।इस्लामाबाद में पाकिस्तान की मध्यस्था से ईरान व अमेरिका के बीच हुई पहली सीधी वार्ता के असफल होने के बाद सीजफायर और शांति वार्ता आयोजित की गई, लेकिन वे विफल रही।

इसके बाद अमेरिका ने ईरान पर दबाव बनाने के लिए 13-14 अप्रैल से होर्मुज जलडमरूमध्य की नौसैनिक नाकेबंदी लगा दी। राष्ट्रपति ट्रंप के ताजे बयान से साफ है कि अमेरिका अभी वहां पर अपनी सैन्य उपस्थिति बना कर रखेगा।

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