अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के बीच एक नया विवाद सामने आया है।
कई अमेरिकी सैनिकों ने आरोप लगाया है कि सैन्य कमांडर ईरान के साथ युद्ध को बाइबिल की एंड-टाइम भविष्यवाणियों से जोड़कर पेश कर रहे हैं।
वरिष्ठ पत्रकार जोनाथन लार्सन की सबस्टैक रिपोर्ट के अनुसार, सैनिकों को दिए गए कुछ आधिकारिक ब्रीफिंग में जीसस की वापसी और आखिरी विनाशकारी युद्ध जैसे धार्मिक संदर्भों का उल्लेख किया गया।
मिलिट्री रिलिजियस फ्रीडम फाउंडेशन ने बताया कि उसे अमेरिकी सशस्त्र बलों के सैनिकों से 110 से अधिक शिकायतें मिली हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, ये शिकायतें कम से कम 30 सैन्य ठिकानों और 40 से ज्यादा यूनिट्स से जुड़ी हुई हैं। कई शिकायतों में कहा गया है कि कुछ कमांडर युद्ध को ईश्वर की योजना का हिस्सा बताते हुए बाइबिल की भविष्यवाणियों का हवाला दे रहे हैं।
कमांडर ने युद्ध को आर्मागेडन से जोड़ा
लार्सन की रिपोर्ट में दर्ज एक शिकायत के अनुसार, एक कमांडर ने नॉन-कमीशंड ऑफिसर्स को संबोधित करते हुए ईरान युद्ध को सीधे बाइबिल की भविष्यवाणी से जोड़ दिया।
शिकायत में कहा है कि कमांडर ने अधिकारियों से कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यीशु ने अभिषेक किया है ताकि वे ईरान में संकेत की आग जलाएं, जिससे आर्मागेडन शुरू हो और उनकी पृथ्वी पर वापसी का मार्ग बने।
एक अन्य ईमेल में एक सैनिक ने बताया कि उनकी यूनिट, जो फिलहाल ईरान के युद्ध क्षेत्र से बाहर लेकिन रेडी-सपोर्ट स्थिति में है, वहां भी इसी तरह का संदेश दिया गया।
एनसीओ ने लिखा कि कमांडर ने नेताओं को सैनिकों तक यह संदेश पहुंचाने के लिए कहा कि यह युद्ध ईश्वर की दिव्य योजना का हिस्सा है।
उन्होंने बाइबिल की बुक ऑफ रिवेलेशन से आर्मागेडन और यीशु की वापसी से जुड़े कई संदर्भ भी बताए। इस शिकायत को 15 सैनिकों की ओर से एमआरएफएफ को भेजा गया था, जिनमें कम से कम 11 ईसाई, एक मुस्लिम और एक यहूदी सैनिक शामिल थे।
एकता पर पड़ सकता है असर
शिकायत करने वाले एनसीओ ने चेतावनी दी कि इस तरह के धार्मिक बयान यूनिट की एकता और मनोबल को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
शिकायत में कहा कि ऐसे बयान मोराल और यूनिट कोहेजन को नष्ट करते हैं और संविधान की रक्षा की उस शपथ का उल्लंघन करते हैं जो हमने ली है।
रिपोर्ट के मुताबिक एमआरएफएफ शिकायतकर्ताओं की पहचान सार्वजनिक नहीं कर रहा है, ताकि उन्हें रक्षा विभाग की ओर से किसी तरह की कार्रवाई या प्रतिशोध का सामना न करना पड़े।
यह आरोप ऐसे समय सामने आए हैं जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में अमेरिकी सेना के भीतर धार्मिक संदेशों के इस्तेमाल को लेकर चिंता बढ़ गई है। एमआरएफएफ के अध्यक्ष मिकी वाइनस्टीन ने कहा कि ईरान पर हमलों के बाद से उनकी संस्था को बड़ी संख्या में शिकायतें मिल रही हैं।
उन्होंने कहा कि आधिकारिक सैन्य संचार में धार्मिक विचारधारा को शामिल करना संविधान और यूनिफॉर्म कोड ऑफ मिलिट्री जस्टिस का उल्लंघन हो सकता है। वाइनस्टीन ने कहा कि यदि कोई सैन्य अधिकारी अपने अधीनस्थों पर धार्मिक विचार थोपने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
अमेरिकी राजनीति और सेना में धर्म की बढ़ती भूमिका
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिकी राजनीति और सुरक्षा संस्थानों में प्रोटेस्टेंट ईसाई विचारधारा के बढ़ते प्रभाव पर बहस चल रही है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ पेंटागन और व्हाइट हाउस में धार्मिक सभाओं को बढ़ावा देते रहे हैं।
पेंटागन में मासिक प्रार्थना सभाओं का प्रसारण किया जाता है और हेगसेथ व्हाइट हाउस में आयोजित साप्ताहिक बाइबल अध्ययन सत्र में भी हिस्सा लेते हैं। यह सत्र उपदेशक राल्फ ड्रोलिंगर के नेतृत्व में होता है और इसमें अक्सर इजरायल के समर्थन से जुड़े धार्मिक तर्क दिए जाते हैं।
युद्ध के कारणों पर भी उठ रहे सवाल
ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू करने को लेकर ट्रंप प्रशासन पहले से ही आलोचनाओं का सामना कर रहा है। पॉलिटिको और फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस अब तक युद्ध के लिए एक स्पष्ट और स्थिर कारण प्रस्तुत नहीं कर पाया है। अमेरिकी अधिकारियों ने अलग-अलग समय पर परमाणु खतरे, बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और इजरायल की सुरक्षा को युद्ध का कारण बताया है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका ने भविष्य के हमलों को रोकने के लिए पहले कार्रवाई की। उन्होंने कहा कि अगर हम पहले हमला नहीं करते, तो हमें ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता था। हालांकि आलोचकों का कहना है कि युद्ध शुरू होने के बाद प्रशासन बार-बार अलग-अलग कारण पेश कर रहा है।
ट्रंप समर्थकों में भी चिंता
रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप के कुछ राजनीतिक सहयोगियों को भी चिंता है कि अगर यह संघर्ष लंबा चला तो राष्ट्रपति के उस वादे पर सवाल उठ सकते हैं जिसमें उन्होंने नए मध्य-पूर्वी युद्धों से बचने की बात कही थी।
रिपब्लिकन रणनीतिकार मैथ्यू बार्टलेट ने कहा कि यदि युद्ध लंबा खिंचता है तो इसके उद्देश्य को लेकर सवाल और बढ़ सकते हैं। वहीं कंजरवेटिव कम्युनिकेशन एग्जीक्यूटिव वनेसा सैंटोस ने कहा कि ट्रंप समर्थक युद्ध के पूरी तरह खिलाफ नहीं हैं, लेकिन वे अनंत युद्ध नहीं चाहते।