नीट पेपर लीक को लेकर हुए जेन जी के आंदोलन के बाद शिक्षा सुधारों का मुद्दा चर्चा में है। प्राथमिक शिक्षा और उच्च शिक्षा दोनों बुनियादी सुविधाओं और संसाधनों की कमी से जूझ रही है।
देश में स्वास्थ्य क्षेत्र की स्थिति भी इससे बहुत अलग नहीं है। 140 करोड़ से अधिक आबादी वाले भारत में डाक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की संख्या ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। देश में प्रति 10,0000 आबादी पर 10.5 डाक्टर उपलब्ध हैं और स्वास्थ्य कर्मियों की संख्या प्रति 10,000 आबादी पर 73 है।
वहीं, भारत से कम आबादी वाले देश चीन में भारत की तुलना में डॉक्टरों की संख्या तीन गुना और स्वास्थ्य कर्मियों की संख्या दो गुना है। डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की संख्सा में बड़े पैमाने पर कमी देश में 100 प्रतिशत आबादी को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने में सबसे बड़ी बाधा है।
द लैंसेट पब्लिक हेल्थ जर्नल प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है कि दक्षिण एशिया में आबादी के अनुपात में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की किल्लत सबसे ज्यादा है। इस उपमहाद्वीप में 26 लाख डाक्टरों, 1 करोड़ नर्सों, 7 लाख डेंटिस्ट और 3 लाख फार्मासिस्ट की कमी है।
भारत और चीन- स्वास्थ्य सेवाओं की तुलना
| श्रेणी | भारत | चीन |
| डॉक्टर | 10.6 | 30 |
| स्वास्थ्य कर्मी | 73 | 130 |
| नर्स | 10.8 | 45 |
महिला स्वास्थ्य कर्मियों की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत
अध्ययन में यह भी पाया गया है कि 1920 और 2023 के बीच वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य कर्मियों की संख्या 4.9 करोड़ से बढ़ कर करीब तीन गुनी 12.21 करोड़ हो गई है। इस ग्रोथ में 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी महिलाओं की रही और 2023 में कुल स्वास्थ्य कर्मियों में महिलाओं की संख्या करीब 70 प्रतिशत थी।
दुनिया में कुल डॉक्टरों में 43.9 प्रतिशत और ज्यादातर नर्सें (80.7 प्रतिशत) महिलाएं हैं। वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य कर्मियों में महिलाओं की संख्या 89.5 प्रतिशत है। अध्ययन के मुख्य लेखक मेगन नाइट का कहना है कि महिलाओं ने पिछले तीन दशकों में वैश्विक स्वास्थ्य कार्यबल की सूरत बदल दी है लेकिन उनकी संख्या ऐसे प्रोफेशन में ज्यादा है जहां आम तौर पर कम वेतन मिलता है और नेतृत्व की भूमिका में आने के मौके भी बेहद कम है।
भारत में सामुदायिक स्वास्थ्य कर्मी ज्यादा
2023 में भारत ब्राजील, थाइलैंड और रवांडा सहित उन देशों में शामिल था, जहां सामुदायिक स्वास्थ्य कर्मियों की संख्या सबसे अधिक थी। इन देशों में प्रति 10,000 आबादी पर 16.2 सामुदायिक स्वास्थ्य कर्मी थे। वहीं उच्च आय वाले देशों में प्रति 10,000 आबादी पर सामुदायिक स्वास्थ्य कर्मियों की संख्या एक से कम थी।