बादशाह-हनी सिंह के गानों से अलग है पंजाब का असली संगीत, हर मौके पर गूंजते हैं जुगनी और टप्पे जैसे लोकगीत…

पंजाबी गाने सुनते ही आपके दिमाग बादशाह और हनी सिंह के गाने आते होंगे, लेकिन असली पंजाबी म्युजिक इससे काफी अलग है। पंजाब का लोकसंगीत यहां की संस्कृति और जीवन की झलक पेश करता है।

फसल की कटाई से लेकर शादी-ब्याह और वीरता की गाथाओं तक, पंजाबी लोक संगीत में यह सब सुनने को मिलता है। आइए जानते हैं पंजाब के असली लोक संगीत के बारे में। 

शादियों में घोड़ियां और सुहाग की धूम

पंजाब में शादी-ब्याह के मौके बिना लोक संगीत के अधूरे हैं। दुल्हन की ओर सुहाग गाए जाते हैं, जिसमें शादीशुदा जिंदगी की मंगल कामना के साथ बेटी के लिए प्यार और दुलार की झलक मिलती है। वहीं दूल्हे के यहां घोड़ियां की गूंज सुनाई देती है। इसमें दूल्हे की शादी की तैयारी और उसकी मां के प्यार और बारात की तैयारियों का जिक्र होता है। 

बोलियां और टप्पे के बिना अधूरे हैं त्योहार

पंजाब के त्योहार, खासकर बैसाखी और लोहड़ी पर लोकगीत जरूर गाए जाते हैं। भांगड़ा और गिद्दा पर बोलियां गाई जाती हैं। ये छोटी-छोटी तुकबंदियां होती हैं, जो ऊंची आवाज और ढोलक की थाप पर गाई जाती हैं। बोलियां गाते समय माहौल में गजब की ऊर्जा फैल जाती है। 

वहीं टप्पे पंजाब के पारंपरिक रैप बैटल हैं। इसमें दो लोग या समूह आमने-सामने बैठकर मजाकिया और काव्यात्मक ढंग से एक-दूसरे पर तंज कसते हैं और एक-दूसरे को जवाब देते हैं। 

प्रेम और वियोग के गीत हैं माहिया और ढोला

पंजाब सोहणी-महीवाल और हीर-रांझा जैसी अमर प्रेम कहानियों के लिए जाना जाता है। इसलिए यहां के लोकगीतों में भी इनका जिक्र मिलता है। माहिया और ढोला दो-दो पंक्तियों में गाई जाती हैं, जिसमें प्रेमी और प्रेमिका के बीच की बातचीत का जिक्र मिलता है। इनके जरिए प्रेमी-प्रेमिका की विरह, तड़प और प्यार को बयां किया जाता है। 

जुगनी में समाज की झलक

जुगनी पंजाब के लोक संगीत का काफी दिलचस्प हिस्सा है। इसमें जुगनी के नाम के एक काल्पनिक चरित्र के माध्यम से समाज, राजनीति और मानवीय स्वभाव पर कटाक्ष किया जाता है। यह गीतों के जरिए एक समाज की भावना को बयां करते हैं। 

वार में सुनाई जाती हैं वीर गाथाएं

पंजाब की धरती योद्धाओं और शूरवीरों से भरपूर है। वार लोकगीतों में इन्हीं कहानियों को सुनाया जाता है। इनमें वीर योद्धाओं के बलिदान और वीरता की गाथा गाई जाती है। इन लोकगीतों को ढड जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों पर गाया जाता है। 

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