अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक वैश्विक टैरिफ को रद कर दिया।
कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रंप ने आपातकालीन कानून का गलत इस्तेमाल किया और अपने अधिकारों से आगे बढ़कर टैरिफ लगाए।
यह मामला उन कंपनियों और 12 अमेरिकी राज्यों द्वारा दायर किया गया था, जो इन टैरिफ से प्रभावित हुए थे। निचली अदालतों ने पहले ही ट्रंप के फैसले को गैरकानूनी बताया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा।
ट्रंप पहले ऐसे राष्ट्रपति बने जिन्होंने IEEPA के तहत टैरिफ लगाए। इससे पहले इस कानून का इस्तेमाल दुश्मन देशों पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने या उनकी संपत्ति फ्रीज करने के लिए किया जाता था।
ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि IEEPA राष्ट्रपति को आयात को ‘नियंत्रित’ करने की अनुमति देता है और उसी आधार पर टैरिफ लगाए गए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया।
कितनी रकम दांव पर?
अर्थशास्त्रियों के अनुसार IEEPA के तहत लगाए गए टैरिफ से अब तक 175 अरब डॉलर से ज्यादा की वसूली हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह रकम वापस करनी पड़ सकती है।
कांग्रेसनल बजट ऑफिस के मुताबिक, यदि सभी मौजूदा टैरिफ अगले 10 साल तक जारी रहते, तो हर साल लगभग 300 अरब डॉलर की आय हो सकती थी। वित्त वर्ष 2025 में अमेरिका की कुल कस्टम ड्यूटी से आय 195 अरब डॉलर रही, जो एक रिकॉर्ड है। सरकार ने 14 दिसंबर के बाद से टैरिफ वसूली का आधिकारिक डेटा जारी नहीं किया है।
ट्रंप का तर्क
ट्रंप ने इन टैरिफ को अमेरिका की आर्थिक सुरक्षा के लिए जरूरी बताया था। उनका कहना था कि बिना टैरिफ के अमेरिका कमजोर हो जाएगा और दूसरे देश उसका फायदा उठाते रहेंगे। उन्होंने खासतौर पर चीन का नाम लिया था।
2 अप्रैल को ‘लिबरेशन डे’ कहकर ट्रंप ने ज्यादातर व्यापारिक साझेदार देशों पर ‘रिसिप्रोकल’ यानी जवाबी टैरिफ लगाने की घोषणा की थी।
इससे पहले फरवरी और मार्च 2025 में उन्होंने चीन, कनाडा और मैक्सिको पर भी टैरिफ लगाए थे। उन्होंने इसे फेंटानिल और अन्य नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़ा राष्ट्रीय आपातकाल बताया था।
ट्रंप ने टैरिफ का इस्तेमाल दूसरे देशों पर दबाव बनाने के लिए भी किया। इसमें ब्राजील द्वारा पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो पर मुकदमा चलाना, भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद और कनाडा के ओंटारियो प्रांत का एंटी-टैरिफ विज्ञापन जैसे मुद्दे शामिल थे।
आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद ट्रंप ने कहा था कि यदि फैसला उनके खिलाफ आता है तो वह ‘प्लान बी’ यानी दूसरा रास्ता अपनाएंगे। ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने भी कहा है कि प्रशासन अन्य कानूनी प्रावधानों का इस्तेमाल कर अधिक से अधिक टैरिफ बनाए रखने की कोशिश करेगा।
इनमें राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर टैरिफ लगाने वाला कानून और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि द्वारा अनुचित व्यापार प्रथाओं के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की अनुमति देने वाले प्रावधान शामिल हैं।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि ये विकल्प IEEPA जितनी व्यापक और तुरंत लागू होने वाली ताकत नहीं देंगे।