सोना-चांदी को सुरक्षित निवेश मानने की धारणा कमजोर, पश्चिम एशिया युद्ध ने बदल दी बाजार की सोच…

सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोना और चांदी भी पश्चिम एशिया में चल रही जंग की आंच में झुलस रहे हैं।

सोमवार को महज तीन घंटे के कारोबार के दौरान कीमती धातुओं के बाजार मूल्य में दो ट्रिलियन डॉलर की गिरावट दर्ज की गई। खास बात यह है कि यह स्थिति तब थी जब तेल की कीमतें स्थिर रहीं और अमेरिकी शेयर वायदा बाजार में तेजी थी।

कमोडिटी बाजार पर नजर रखने वाले कारोबारी एडम कोबेसी द्वारा संचालित शोध संस्थान ने इस पूरे घटनाक्रम का आकलन किया है।

उन्होंने कहा कि सबसे पहले बांड बाजार की बात करें तो अमेरिकी 10 वर्षीय बांड पर रिटर्न कुछ सप्ताह में बढ़कर 4.4 प्रतिशत के करीब पहुंच गया है, क्योंकि व्यापारियों ने मुद्रास्फीति के नहीं बढ़ने और ब्याज दरों में कम कटौती की आशंका जताई है। जब ट्रेजरी बांड अचानक अधिक ब्याज दर पर बिक रहे हों तो शून्य रिटर्न वाला सोना कोई क्यों रखेगा।

लोग धातुओं से पूंजी खींचकर सरकारी बांडों में लगा रहे हैं, जिससे सोना सुरक्षित निवेश नहीं रहा। इतना ही नहीं, ईरान युद्ध के बढ़ने के साथ डॉलर ने सर्वोच्च सुरक्षित निवेश के तौर पर अपना पुराना दर्जा फिर से हासिल कर लिया है। यह सोने के लिए दोहरा झटका है।

महीनों की तीव्र वृद्धि के बाद सोने और विशेष रूप से चांदी में निवेश लीवरेज, वायदा, विकल्प और ऐसे इंस्ट्रूमेंट से भरा हुआ था, जो केवल तभी काम करते हैं जब कीमतें बढ़ती हैं। कीमती धातुओं में बहुत कुछ अजीब हो रहा है।

पूरे कमोडिटी बाजार पर दिखा तनाव का असर

बेंगलुरु के एक ट्रेडर नवीन कहते हैं कि डेटा इस बात की पुष्टि करता है कि हम एक ऐतिहासिक लिक्विडिटी घटना के साक्षी बन रहे हैं। दो ट्रिलियन डॉलर का यह नुकसान कोई रहस्य नहीं है बल्कि यह एक मार्जिन काल है।

कमोडिटी बाजार के वायदा बाजार पर नजर डालें तो सोमवार दोपहर 12:15 बजे एमसीएक्स आईकॉमडेक्स बेस मेटल इंडेक्स 1.68 प्रतिशत नीचे था, जो इस बात का संकेत है कि तनाव सिर्फ बुलियन तक सीमित नहीं है बल्कि पूरे कमोडिटी बाजार में फैल गया है।

अप्रैल 2026 के गोल्ड फ़्यूचर्स 8.11 प्रतिशत गिरकर 1,32,767 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गए, जबकि मई 2026 के सिल्वर फ़्यूचर्स और भी ज्यादा यानी 10.72 प्रतिशत गिरकर 2,02,465 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई।

तांबा भी 2.76 प्रतिशत नीचे था, ¨जक भी नीचे था और गोल्ड ईटीएफ में नौ प्रतिशत तक का नुकसान हो रहा था। अब ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कोई बड़ा खिलाड़ी अपनी होल्डिंग बेच रहा है।

अभी तक किसी ने उसका नाम तो नहीं बताया है, लेकिन इसके संकेत साफ हैं। दरअसल, सुरक्षित निवेश वाली धारणा असल समय में टूट रही है।

अगर ऊंचे रिटर्न, मजबूत डालर, कम लिक्विडिटी की वजह से कीमती धातुओं के मामले में हालात इतनी तेजी से बदल सकते हैं, तो सोचिए तब क्या होगा जब यही दबाव क्रेडिट बाजार और उभरते बाजारों पर पड़ेगा।

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