गौरव वल्लभ की एंट्री से बदला राज्यसभा चुनाव का गणित, झारखंड में भाजपा के सामने नई राजनीतिक चुनौती…

झारखंड में अरसे बाद इस बार राज्यसभा चुनाव में धनबल के स्थान पर ज्ञानबल का जोर होने जा रहा है।

दो सीटों पर 18 जून को होने जा रहे चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा के मुकाबले भाजपा की ओर से प्रो. गौरव वल्लभ प्रत्याशी होने जा रहे हैं।वह जमशेदपुर स्थित एक्सएलआरआई में प्रोफेसर हैं। औपचारिकता पूरी कर ली गई है।

सिर्फ आधिकारिक घोषणा बाकी है। संख्या बल के हिसाब से पहली सीट पर झामुमो प्रत्याशी का जीतना तय है। असली मुकाबला दूसरी सीट पर होना है, क्योंकि जीत के लिए 28 विधायकों का समर्थन चाहिए और भाजपा के पास सिर्फ 24 विधायक हैं।

राज्यसभा का प्रत्येक चुनाव सौदेबाजी

जाहिर है, वोट प्रबंधन की जरूरत दोनों पक्षों को पड़ेगी। अलग प्रदेश बनने के बाद झारखंड में राज्यसभा का प्रत्येक चुनाव सौदेबाजी एवं क्रास वोटिंग का साक्षी रहा है। अबकी पहली चुनाव की खासियत प्रत्याशियों की पृष्ठभूमि बनने जा रही है।

कांग्रेस ने जहां संगठन और राजनीतिक अनुभव को प्राथमिकता दी है, वहीं भाजपा ऐसे चेहरे पर दांव लगाने जा रही है, जिसकी पहचान मुख्य रूप से आर्थिक नीति के विशेषज्ञ के रूप में रही है। यही कारण है कि इस चुनाव को परंपरागत शक्ति प्रदर्शन के बजाय बौद्धिक और वैचारिक मुकाबले के रूप में भी देखा जा रहा है।

गौरव वल्लभ अभी प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के सदस्य हैं। आर्थिक नीतियों एवं वित्तीय जोखिम प्रबंधन जैसे विषयों पर उनकी विशेषज्ञता को सरकार के भीतर भी महत्व दिया जा रहा है।

गौरव वल्लभ की राजनीतिक यात्रा 

अधिकांश लोग गौरव वल्लभ की राजनीतिक यात्रा को कांग्रेस से जोड़कर देखते हैं, जबकि भाजपा के भीतर उनकी वैचारिक और बौद्धिक भूमिका डेढ़ दशक पुरानी रही है। वर्ष 2010 में भाजपा के थिंक टैंक से जुड़े थे। वर्ष 2014 में अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर उनकी पुस्तक पालिटिक्स आफ परफार्मेंस का विमोचन स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली में किया था, जिसे भाजपा के वैचारिक साहित्य का हिस्सा माना जाता है।

हालांकि 2018 में वे कांग्रेस में शामिल हो गए और जमशेदपुर पूर्व विधानसभा सीट तथा राजस्थान की उदयपुर सीट से चुनाव लड़े लेकिन सफलता नहीं मिली। अप्रैल 2024 में उन्होंने कांग्रेस छोड़ फिर भाजपा का दामन थाम लिया और राष्ट्रीय मंचों पर आर्थिक और नीतिगत मुद्दों पर पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए।

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