‘शैडो प्रिंस’ से ईरान के संभावित सर्वोच्च नेता तक का सफर: कौन हैं Mojtaba Khamenei?…

ईरान में हाल ही में मोजतबा खामेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता चुना गया है।

लंबे समय तक पर्दे के पीछे रहने वाले इस नेता को कई लोग ‘शैडो प्रिंस’ यानी छाया में रहने वाला राजकुमार भी कहते हैं।

मोजतबा का जीवन काफी गोपनीय रहा है। कहा जाता है कि बड़ी संख्या में ईरानियों ने आज तक उनकी आवाज तक नहीं सुनी है।

फिर भी वे देश की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था में लंबे समय से प्रभावशाली भूमिका निभाते रहे हैं।

किशोर उम्र में ही युद्ध में शामिल

1980 के दशक में जब ईरान-इराक युद्ध अपने चरम पर था, तब 17 साल के मुजतबा ने आराम की जिंदगी छोड़कर ईरान की ‘हबीब उन मुजाहिर’ बटालियन में शामिल होने का फैसला किया।

उस समय उनके पिता अली खामेनेई ईरान के राष्ट्रपति थे। युद्ध के दौरान उनके साहस और भूमिका के कारण इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड ऑफ कॉर्प्स के कई वरिष्ठ अधिकारियों के बीच उन्हें सम्मान मिला।

धर्म और शिक्षा में गहरी रुचि

मोजतबा खामेनेई की खास रुचि इस्लामिक न्यायशास्त्र में बताई जाती है। वे ईरान के प्रमुख धार्मिक शहर एक मदरसे में वरिष्ठ शिक्षक भी रहे हैं और लंबे समय तक धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करते रहे हैं। धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ उन्हें तकनीक, साइबर ऑपरेशन और खुफिया गतिविधियों में भी दिलचस्पी है।

मोजतबा का अधिकांश जीवन सार्वजनिक नजरों से दूर बीता है। इसी कारण कुछ ईरानी कॉमेडियन उन्हें ‘शैडो प्रिंस’ कहते हैं। उन्हें घुड़सवारी, पहाड़ों में घूमना और लंबी पैदल यात्रा करना पसंद है। उनका रहन-सहन भी अपने पिता की तरह सादा बताया जाता है।

कैसा बिता बचपन?

मोजतबा का बचपन धार्मिक अनुशासन और सादगी में बीता। वे पांच भाई-बहनों में से एक हैं मोस्तफा, मोजतबा, मसूद और दो बहनें बोशरा व होदा। उन्होंने तेहरान के प्रतिष्ठित अलवी हाई स्कूल से पढ़ाई की और बाद में कोम से धार्मिक शिक्षा प्राप्त की।

मोजतबा की शादी 1999 में जहरा हद्दाद-आदेल से हुई थी। वे ईरान के पूर्व संसद अध्यक्ष गुलाम-अली हद्दाद-आदिल की बेटी थीं। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार एक इजराइली हवाई हमले में जहरा और परिवार के कुछ अन्य सदस्यों की मौत हो गई।

परमाणु कार्यक्रम के समर्थक

मोजतबा खामेनेई ईरान के परमाणु कार्यक्रम के मजबूत समर्थक माने जाते हैं। 2020 में उन्होंने यूरेनियम संवर्धन बढ़ाने के पक्ष में जोर दिया था। उनका मानना है कि ईरान को परमाणु शक्ति के रूप में मजबूत बनना चाहिए।

1990 के दशक में वे अपने पिता के सलाहकार बने। रिपोर्ट्स के अनुसार बिना किसी औपचारिक पद के भी उनका इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड ऑफ कॉर्प्स में वरिष्ठ नियुक्तियों पर प्रभाव था। बताया जाता है कि 2019 में जनरल हुसैन सलामी को आईआरजीसी का प्रमुख बनाने में भी उनकी भूमिका रही।

सर्वोच्च नेता बनने तक का सफर

2005 के बाद वे खुफिया एजेंसियों और बासिज मिलिशिया के कामकाज में सक्रिय हो गए। 2026 में असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने उन्हें ईरान का सर्वोच्च नेता चुना। इसके बाद से वे देश की सबसे ताकतवर राजनीतिक और धार्मिक हस्ती बन गए हैं।

मोजतबा खामेनेई पर 2009 के चुनावी विरोध और 2022 के हिजाब आंदोलन को कठोर तरीके से दबाने के आरोप भी लगे हैं। कहा जाता है कि उनके निर्देश पर इन आंदोलनों के दौरान सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया गया था। पश्चिमी मीडिया में यह भी आरोप लगाए गए हैं कि उनके पास लंदन, दुबई, जर्मनी और स्पेन में महंगी संपत्तियां हैं, हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

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