मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर अब ऊर्जा क्षेत्र पर दिखने लगा है, International Energy Agency (IEA) ने चेतावनी दी है कि ऊर्जा उत्पादन करीब दो साल पीछे जा सकता है…

अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध के बीच लगभग 40 दिनों तक छिड़े घमासान ने पश्चिम एशिया में ऊर्जा उत्पादन को दो साल पीछे कर दिया है।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आइईए) का अनुमान है कि इस क्षेत्र में ऊर्जा उत्पादन को युद्ध पूर्व स्तर पर लौटने में करीब दो साल लग सकते हैं।

आइईए के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने स्विट्जरलैंड के अखबार ‘नोयए ज्यूरिखर साइटुंग’ को दिए साक्षात्कार में यह आकलन जताया।

बिरोल के मुताबिक, क्षेत्र में तेल और गैस उत्पादन की बहाली अलग-अलग देशों में भिन्न गति से होगी।

उन्होंने कहा कि इराक जैसे देशों में पुनर्बहाली में सऊदी अरब की तुलना में अधिक समय लग सकता है, क्योंकि उत्पादन क्षमता और बुनियादी ढांचे की स्थिति अलग-अलग है।

उन्होंने चेताया कि सीमित समूहों द्वारा भी वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित की जा सकती है, जिससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है।

क्या-क्या जताई गई आशंका

मौजूदा हालात में उड़ानों के रद होने, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और परमाणु ऊर्जा की वापसी की दिशा में तेजी आने की आशंका जताई गई है।

इस बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव भी वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बड़ी चुनौती बना रहा। सैकड़ों जहाज ईरानी दबाव और अमेरिकी नाकेबंदी के चलते जहां के तहां फंसे हुए हैं।

यहां से वैश्विक जरूरत का 20 प्रतिशत तेल और गैस पूरी दुनिया में जाता है। अमेरिका और ईरान के बीच हुआ युद्धविराम फिलहाल 22 अप्रैल तक लागू है, लेकिन इसके आगे बढ़ने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि यदि वार्ता में प्रगति होती है तो युद्धविराम बढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ सकती।

इधर, होर्मुज को लेकर ही ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों लगभग 40 देशों के नेताओं के साथ एक वर्चुअल शिखर बैठक करने जा रहे हैं।

हालांकि, ईरान ने नए बयान में कहा है कि होर्मुज अब सभी देशों के लिए खुला है। ऐसे में दुनिया के लिए ये राहत की खबर है।

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