‘अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ बढ़ती नफरत चिंताजनक’: हिंदू मंदिर पर हमले की साजिश के बाद सांसद कृष्णमूर्ति ने जताई चिंता…

अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने अमेरिका में भारतीयों और एशियाई मूल के लोगों के खिलाफ बढ़ती नफरत पर चिंता जताई है। उन्होंने चेतावनी दी कि राजनीतिक नेताओं की नफरत भरी बयानबाजी हिंसा में बदल सकती है।

साथ ही, उन्होंने शिकागो के पास एक हिंदू मंदिर पर हमले की कथित साजिश का समय रहते पता नहीं लगा पाने पर संघीय जांच एजेंसी (एफबीआइ) से सवाल किए जाने चाहिए।

एक विशेष साक्षात्कार में कृष्णमूर्ति ने कहा कि 11 अक्तूबर को बालाजी मंदिर के बाहर गोली चलाने के बाद संदिग्ध का हथियार जाम हो गया, जिससे एक बड़ी त्रासदी बच गई। उन्होंने सवाल उठाया कि कथित तौर पर दो साल से चल रही साजिश की जानकारी जांच एजेंसियों को क्यों नहीं मिली।

एफबीआइ निदेशक काश पटेल की चुप्पी पर उन्होंने कहा कि इसका जवाब वही दे सकते हैं।

कृष्णमूर्ति ने उन सांसदों की भी आलोचना की, जिन्होंने घटना की सार्वजनिक रूप से निंदा नहीं की। उनके मुताबिक, ऐसे मामलों में चुप्पी को गलत तरीके से समर्थन के रूप में देखा जा सकता है।

उन्होंने कहा कि नेताओं को हिंदू, मुस्लिम, यहूदी, ईसाई और सिख समेत हर समुदाय के खिलाफ नफरत की निंदा करनी चाहिए।कृष्णमूर्ति ने राजनीतिक हस्तियों पर विभाजनकारी बयानबाजी को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।

उन्होंने टेक्सास के बो फ्रेंच का उदाहरण दिया, जिनके बारे में उन्होंने कहा कि उन्होंने फुटबाल मैच देखने गए भारतीय मूल के बच्चों को विदेशी बताकर अमेरिकी नागरिकों की जगह लेने वाला कहा था।

कृष्णमूर्ति के अनुसार, इनमें कई बच्चों का जन्म टेक्सास में हुआ था। उन्होंने इन टिप्पणियों को आव्रजन संबंधी चिंता के बजाय नस्ली पूर्वाग्रह का उदाहरण बताया।

उन्होंने अमेरिकी शिक्षा विभाग की एक इंटरनेट मीडिया पोस्ट की भी आलोचना की, जिसमें टेक्सास विश्वविद्यालय के फुटबाल मैच में श्वेत दर्शकों की तस्वीर के साथ लिखा गया था- कालेज फुटबाल को फिर से महान बनाएं।

कृष्णमूर्ति ने कहा कि ऐसी पोस्ट नफरत भरी सोच को बढ़ावा देती हैं। उन्होंने आगाह किया कि इस तरह की बयानबाजी पर अमल करने के लिए किसी एक व्यक्ति का आगे आना ही काफी हो सकता है।मंदिर की घटना का जिक्र करते हुए कृष्णमूर्ति ने कहा कि संदिग्ध पर हथियारों और आतंकवाद से जुड़े आरोप लगाए गए हैं।

उन्होंने संघीय एजेंसियों से घरेलू हिंसक उग्रवाद की जांच के लिए अधिक संसाधन लगाने की मांग की। साथ ही, उन्होंने संदिग्ध के आनलाइन संपर्कों और कट्टरपंथ की ओर बढ़ने की प्रक्रिया की पड़ताल करने पर जोर दिया।

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