बिहार में पूर्वी चंपारण जिले के सुगौली स्थित हिंदुस्तान बायोफ्यूल लिमिटेड में इस बार गन्ने के रस से सीधे एथनाल का निर्माण नहीं किया जाएगा। पहले गन्ने के रस से चीनी तैयार की जाएगी। इसके बाद चीनी निर्माण के दौरान निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थ से एथनाल का उत्पादन होगा।
चीनी की कमी को दूर करने और उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से यह बदलाव किया गया है। सरकार के निर्देश के आलोक में मिल प्रबंधन ने इस सत्र में उत्पादन प्रक्रिया में परिवर्तन का निर्णय लिया है।
मिल में पेराई सत्र शुरू करने की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। प्रबंधन के अनुसार, 10 नवंबर के बाद गन्ने की पेराई शुरू की जा सकती है। लगभग चार महीने तक चलने वाले इस सत्र में गन्ने की पेराई के साथ चीनी और एथनाल का उत्पादन किया जाएगा।
इस वर्ष जिले में करीब 26 हजार एकड़ में गन्ने की खेती हुई है। मिल प्रबंधन ने इस सत्र में 45 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई का लक्ष्य निर्धारित किया है। निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप पेराई और उत्पादन की व्यवस्था की जा रही है।
प्रतिदिन तीन हजार क्विंटल चीनी 55 से 60 हजार लीटर एथनाल बनाने की क्षमता
हिंदुस्तान बायोफ्यूल लिमिटेड में सामान्य दिनों में प्रतिदिन लगभग तीन हजार क्विंटल चीनी का उत्पादन होता है। वहीं, एथनाल उत्पादन की क्षमता 55 से 60 हजार लीटर प्रतिदिन है।
अब तक उत्पादन प्रक्रिया के तहत गन्ने के रस का इस्तेमाल चीनी बनाने के साथ सीधे इथनाल तैयार करने में भी किया जाता था। इससे गन्ने के रस का एक हिस्सा चीनी निर्माण के बजाय इथनाल उत्पादन में खर्च होता था। इस सत्र में गन्ने के रस से सीधे एथनाल बनाने की प्रक्रिया बंद रखने का निर्णय लिया गया है।
अब पहले गन्ने के रस से चीनी तैयार होगी। इसके बाद बचने वाले अपशिष्ट पदार्थ का इस्तेमाल एथनाल निर्माण में किया जाएगा। इससे चीनी उत्पादन में वृद्धि होने की उम्मीद है। चीनी की उपलब्धता बढ़ने से बाजार में इसकी कमी दूर करने में भी मदद मिल सकती है।
हिंदुस्तान पेट्रोलियम को भेजा जाता है एथनाल
मिल प्रबंधन के अनुसार, यहां तैयार होने वाले एथनाल की खुले बाजार में बिक्री नहीं की जाती है। उत्पादित इथनाल सीधे हिंदुस्तान पेट्रोलियम लिमिटेड को भेजा जाता है।
इसके बाद कंपनी अपने स्तर पर तय करती है कि इथनाल का इस्तेमाल किस उद्देश्य से करना है। प्रबंधन के मुताबिक, पहले भी चीनी निर्माण के बाद निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थ से एथनाल बनाया जाता था।
बाद में गन्ने के रस से सीधे इथनाल उत्पादन की प्रक्रिया शुरू हुई। अब चीनी की कमी को देखते हुए सरकार के निर्देश पर पुरानी व्यवस्था को फिर से अपनाने का निर्णय लिया गया है।
मिल प्रबंधन को उम्मीद है कि नई व्यवस्था से चीनी उत्पादन में बढ़ोतरी होगी और निर्धारित लक्ष्य के अनुसार गन्ने की पेराई के साथ दोनों उत्पादों का निर्माण किया जा सकेगा। अब सबकी निगाहें पेराई सत्र शुरू होने और उत्पादन की वास्तविक स्थिति पर टिकी हैं।
चीनी रिकवरी दर
- वर्ष 2022-23 : प्रति क्विंटल 8.85 किलो
- वर्ष 2023-24 : प्रति क्विंटल 8.96 किलो
- वर्ष 2024.25 : प्रति क्विंटल 8.54 किलो
- वर्ष 2025-26 : प्रति क्विंटल 7.89 किलो
अब तक कितने दिन चली मिल
- वर्ष 2022-23 : 110 दिन
- वर्ष 2023-24 : 132 दिन
- वर्ष 2024.25 : 123 दिन
- वर्ष 2025-26 : 110 दिन
अब तक गन्ने की खेती व खरीदारी
- वर्ष 2022-23 : 20654 एकड़ में खेती व 40.78 लाख क्विंटल
- वर्ष 2023-24 : 30100 एकड़ में खेती व 41.12 लाख क्विंटल
- वर्ष 2024.25 : 33174 एकड़ में खेती व 39.20 लाख क्विंटल
- वर्ष 2025-26 : 26760 एकड़ में खेती व 28.56 लाख क्विंटल
चार साल में 150 दिनों का सरकारी लक्ष्य नहीं हुआ पूरा
सरकार ने सभी मिलों को 150 दिनों तक चलाने का लक्ष्य रखा है। लेकिन पिछले चार पेराई सत्रों में लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया है। इसका मुख्य कारण गन्ना का रकबा पर्याप्त नहीं होना बताया गया है। मिल प्रबंधन के साथ सरकारी स्तर पर रकबा बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
नए क्षेत्रों में किसानों को मुफ्त में गन्ना बीज देकर खेती करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। किसानों को पांच एकड़ में गन्ने की खेती के लिए बीज उपलब्ध कराया जा रहा है। मिल प्रबंधन ने उम्मीद जतायी है कि आने वाले समय में गन्ना का उत्पादन बढ़ेगा।