‘समानता की ओर पहला कदम कानून तक समान पहुंच’, रूस में बोले CJI सूर्यकांत…

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा है कि समानता की ओर पहला कदम कानून तक समान पहुंच प्रदान करना है और इस बात पर जोर दिया कि यह केवल एक प्रक्रियात्मक औपचारिकता नहीं होनी चाहिए।

रूस में सेंट पीटर्सबर्ग अंतरराष्ट्रीय कानूनी फोरम में सीजेआइ सूर्यकांत ने कहा कि कानून तक समान पहुंच का वास्तविक अधिकारों के प्रदान होने में परिणति होनी चाहिए, न कि खोखली वैधानिक घोषणाओं में।

उन्होंने कहा, “हमें यह पूछना चाहिए कि कानून के समक्ष समानता को वास्तविकता में बदलने के लिए वास्तव में क्या आवश्यक है? मेरा उत्तर, जो मैं दुनिया के सबसे बड़े और सबसे जटिल न्यायिक प्रणालियों का अध्यक्षता करते हुए अपने अनुभव से निकालता हूं, यह है कि समानता की ओर पहला कदम कानून तक समान पहुंच प्रदान करना है।”

उन्होंने कहा कि समानता का जन्मस्थान अनिवार्य रूप से 1215 में मैग्ना कार्टा नहीं है। बल्कि, मेरी व्यक्तिगत मान्यता है कि इसकी जड़ें कौटिल्य के अर्थशास्त्र में हैं, जो भारतीय उपमहाद्वीप से संबंधित है और चौथी सदी में समानता का सिद्धांत प्रस्तुत किया।

भारतीय संविधान ने अपनी स्थापना पर एक नई सुबह का वादा किया और लोगों को कानून के समक्ष समानता, गरिमापूर्ण जीवन और समान न्याय सहित कई मौलिक अधिकार प्रदान किए।

अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचे के संबंध में सीजेआई ने कहा कि वैश्विक पूर्व और दक्षिण के कई देश अभी भी अपने संस्थानों का निर्माण कर रहे हैं, उपनिवेशवाद के परिणामों का सामना कर रहे हैं और गरीबी से निपट रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *