भारत की मारक क्षमता में आया पूरा PoK, आतंकी बदल रहे ठिकाने; पाक सरकार भी दे रही सहयोग…

भारत की सेना द्वारा मई 2024 में चलाए गए ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के बाद पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी संगठनों की गतिविधियों का नक्शा तेजी से बदल रहा है।

खुफिया इनपुट्स के अनुसार, जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और हिजबुल मुजाहिद्दीन (HM) जैसे पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी संगठन अब अपने ठिकानों को खैबर पख्तूनख्वा (KPK) प्रांत की ओर स्थानांतरित कर रहे हैं।

इसे केवल भारतीय हमलों के बाद की मजबूरी नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति माना जा रहा है।

क्यों बदल रहे हैं ठिकाने?

विशेषज्ञों के अनुसार, PoK अब भारतीय सटीक हमलों की चपेट में अधिक असुरक्षित माना जा रहा है। दूसरी ओर खैबर पख्तूनख्वा भौगोलिक गहराई, अफगान सीमा की निकटता और अफगान युद्ध से चले आ रहे पुराने जिहादी ठिकानों के कारण आतंकियों को ज्यादा सुरक्षित विकल्प लगता है।

यही कारण है कि आतंकी संगठनों ने अपनी गतिविधियों का बड़ा हिस्सा वहां शिफ्ट करना शुरू कर दिया है।

खुफिया सूत्र बताते हैं कि इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान की सरकारी मशीनरी भी मददगार बनी हुई है। JeM जैसे संगठनों को खुलेआम सभाएं करने दी जा रही हैं और पुलिस सुरक्षा भी उपलब्ध कराई जा रही है।

यहां तक कि राजनीतिक-धार्मिक संगठन जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (JUI) भी इन गतिविधियों में पर्दे के पीछे शामिल है।

ऑपरेशन सिंदूर की मार

7 मई को शुरू हुए ऑपरेशन ‘सिंदूर’ में भारतीय वायुसेना और थलसेना ने पाकिस्तान और PoK में कुल 9 बड़े आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया।

इसमें बहावलपुर का ‘मरकज सुब्हानअल्लाह’ (जैश का हेडक्वार्टर और रिक्रूटमेंट सेंटर) तथा मुरिदके का ‘मरकज तैयबा’ (लश्कर-ए-तैयबा का मुख्यालय) भी शामिल था। इन ठिकानों पर हुए हमलों में कम से कम 100 आतंकी मारे गए थे।

मरकज तैयबा वही कैंप है जहां से मुंबई हमलों के आरोपी अजमल कसाब और डेविड हेडली ने प्रशिक्षण लिया था। इसके अलावा सियालकोट, मुजफ्फराबाद, कोटली, भिंबर और अन्य इलाकों में भी भारतीय सेना ने आतंकी ठिकाने ध्वस्त किए। 7 से 10 मई के बीच भारतीय बलों ने पाकिस्तान के 13 सैन्य ठिकानों और एयरबेस पर भी हमले किए।

खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने हाल ही में खैबर पख्तूनख्वा के मानसेहरा जिले के गढ़ी हबीबुल्लाह में बड़ा सार्वजनिक भर्ती अभियान चलाया। खास बात यह है कि यह कार्यक्रम भारत-पाकिस्तान एशिया कप क्रिकेट मैच शुरू होने से कुछ घंटे पहले आयोजित किया गया।

इस रैली को धार्मिक जलसे का रूप दिया गया, लेकिन वास्तव में यह नए लड़ाकों की भर्ती का अभियान था। इसमें जैश और JUI के कार्यकर्ताओं ने मिलकर भीड़ जुटाई।

मंच पर जैश का केपीके प्रमुख मसूद इलियास कश्मीरी उर्फ अबु मोहम्मद मौजूद था, जो भारत के लिए वांछित आतंकियों की सूची में है और संगठन के संस्थापक मौलाना मसूद अजहर का करीबी माना जाता है।

खुफिया एजेंसियों का आकलन है कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मानसेहरा स्थित जैश के ट्रेनिंग सेंटर ‘मरकज शुहदा-ए-इस्लाम’ के लिए नए आतंकियों की भर्ती करना था।

यह कैंप हाल ही में ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के बाद और अधिक विस्तार दिया जा रहा है।

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