गतिरोध खत्म, आज से पटरी पर लौटेगी संसद; सार्वजनिक परीक्षा विधेयक समेत कई अहम मुद्दों पर होगी चर्चा…

लगातार हंगामे और ठप पड़े कामकाज के बाद मंगलवार से संसद का मानसून सत्र फिर से सामान्य होने की उम्मीद है। नीट पेपर लीक और छात्रों पर पुलिस लाठीचार्ज को लेकर एक सप्ताह से पक्ष-विपक्ष के बीच का गतिरोध टूटता दिख रहा है।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की पहल और सभी दलों के शीर्ष नेताओं से बात के बाद सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक-2026 पर चर्चा पर सहमति बन गई है। इससे संसद का अवरुद्ध विधायी कामकाज फिर से गति पकड़ सकता है। इसके पहले दोनों सदनों में कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही।

विपक्षी दलों से स्पीकर ने की बातचीत 

गतिरोध खत्म कराने के लिए ओम बिरला सदन में लगातार सभी दलों से अपील करते रहे कि यह मुद्दा करोड़ों छात्रों के भविष्य से जुड़ा है और इस पर राजनीति के बजाय गंभीर चर्चा होनी चाहिए।

उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि सरकार छह घंटे से अधिक समय तक चर्चा कराने के लिए तैयार है और विपक्ष को अपनी हर बात विस्तार से रखने का पूरा अवसर मिलेगा।

इसके बाद उन्होंने विभिन्न दलों के फ्लोर लीडर्स से अलग-अलग बातचीत भी की। इसका असर हुआ कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों मंगलवार से विधेयक पर चर्चा शुरू करने के लिए तैयार हो गए।

किरेन रिजिजू की विपक्ष से अपील

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी विपक्ष से अपील की कि वह चर्चा से दूर न भागे। उन्होंने कहा कि देश के करोड़ों लोग संसद की कार्यवाही देख रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि सभी दल परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी एवं मजबूत बनाने के लिए रचनात्मक सुझाव देंगे।

रिजिजू ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य केवल कानून पारित कराना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाना है जिससे भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

सरकार ने पेपर लीक रोकने से जुड़े मौजूदा कानून में संशोधन का विधेयक सोमवार को लोकसभा में पेश किया। विधेयक ऐसे समय में लाया गया है जब नीट परीक्षा में गड़बड़ियों के बाद देशभर में छात्रों का बड़ा आंदोलन हुआ और परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठे।

क्या है विधेयक का उद्देश्य?

सरकार का तर्क है कि विधेयक का उद्देश्य परीक्षा माफिया पर प्रभावी नियंत्रण, नकल और संगठित पेपर लीक पर कड़ी कार्रवाई करना तथा प्रतियोगी परीक्षाओं में युवाओं का भरोसा बहाल करना है।

यदि चर्चा शुरू होती है तो संसद में गतिरोध खत्म होने के साथ ही परीक्षा सुधारों पर व्यापक राष्ट्रीय बहस की भी शुरुआत होगी। सरकार इसे शिक्षा व्यवस्था में बड़ा सुधार मान रही है, जबकि विपक्ष इसे छात्रों के अधिकार, जवाबदेही और सरकारी जवाबदेही से जुड़े बड़े मुद्दे के रूप में देख रहा है।

विपक्ष लगातार छात्रों पर पुलिस लाठीचार्ज का मुद्दा उठाता रहा। इसी कारण पिछले कई दिनों से संसद की कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही और कोई महत्वपूर्ण विधायी काम आगे नहीं बढ़ सका।

विपक्ष ने क्या कहा?

विपक्ष का कहना था कि सरकार पहले छात्रों के साथ हुई कार्रवाई पर जवाब दे, उसके बाद विधेयक पर चर्चा कराई जाए। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की। लगातार हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही चार बार बाधित हुई।

उधर, राज्यसभा में सोमवार को कांग्रेस समेत विपक्षी दल गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग पर अड़े रहे। उनका कहना था कि छात्रों पर पुलिस कार्रवाई पर पहले सरकार को जवाब देना चाहिए। मल्लिकार्जुन खरगे ने गृह मंत्री से सदन में बयान देने की मांग दोहराई।

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