ईरान में बहाई समुदाय पर बढ़ा शिकंजा, विरोध की आवाजों को सख्ती से दबा रही इस्लामिक सरकार…

भारत में बहाई समुदाय के लोग ईरान में चल रहे युद्ध से बहुत दुखी है। दरअसल, युद्ध के कारण ईरानी बहाइयों पर अत्याचार बढ़ गया है। कई भारतीय बहाई मूल रूप से ईरान से ही आए थे और आज भी उनके रिश्तेदार उस देश में रहते हैं।

इस्लामिक रिपब्लिक सरकार ने इस संघर्ष के दौरान अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है और किसी भी अंदरूनी विरोध को बेरहमी से कुचल रही है; ऐसे में ईरानी बहाइयों पर यह सख्ती बहुत ज्यादा बढ़ी हुई है, जो देश का सबसे बड़ा गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय है।

ईरान में संकट आने पर बहाइयों की बढ़ जाती है मुसीबत

बहाई पब्लिक अफेयर्स ऑफिस की प्रतिनिधि नीलाक्षी राजखोवा ने कहा, “ईरानी बहाइयों पर अत्याचार का एक लंबा इतिहास रहा है, जो 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद एक सुनियोजित सरकारी नीति बन गया।

जब भी ईरान में कोई संकट आता है, तो बहाइयों को बलि का बकरा बनाया जाता है। इस्लामिक रिपब्लिक का संविधान तो बहाई धर्म को मान्यता भी नहीं देता, और 1991 में तो एक ऐसा मेमोरेंडम भी जारी किया गया था। जिसमें बहाइयों के विकास को हर तरफ से रोकने की बात कही गई थी।”

इस्लामिक रिपब्लिक ने लंबे समय से बहाइयों को उनके बुनियादी अधिकारों से वंचित रखा है, जैसे कि शिक्षा का अधिकार, सरकारी नौकरी का अधिकार, और यहां तक कि अपने मृतकों को दफनाने के लिए कब्रिस्तान का अधिकार भी नहीं दिया है।

हालिया संघर्ष के दौरान, दर्जनों बहाइयों को बिना किसी उचित कानूनी प्रक्रिया के हिरासत में लिया गया है, उन पर आरोप लगाए गए हैं या उन पर मुकदमा चलाया गया है। इनमें चचेरे भाई-बहन पैवंद और बोरना नईमी भी शामिल हैं।

गिरफ्तारी के बाद वकील भी नहीं दिया जाता

ईरान ह्यूमन राइट्स के अनुसार, 30 वर्षीय पैवंद को 8 जनवरी को केरमान में गिरफ्तार किया गया था। उन पर अन्य ईरानी युवाओं को विरोध प्रदर्शन के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया था। उन्हें कोई वकील नहीं दिया गया और खबरों के मुताबिक, हिरासत के दौरान उन्हें तरह-तरह की यातनाएं दी गईं। जिसमें ‘मॉक एग्जीक्यूशन’ (नकली फांसी) भी शामिल थी।

वहीं, बोरना को 1 मार्च को गिरफ्तार किया गया था और उन्हें भी इसी तरह की यातनाएं दी गईं। बहाई इंटरनेशनल कम्युनिटी और एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, अधिकारियों ने इन चचेरे भाई-बहनों पर अत्यधिक दबाव डालकर उनसे तीन सुरक्षाकर्मियों की हत्या का झूठा इकबालिया बयान जबरन ले लिया।

इजरायल के लिए जासूसी करने का आरोप

ईरान में बहाइयों पर सबसे आम आरोप यह लगाया जाता है कि वे इजरायल के इशारे पर जासूसी करते हैं। बहाई धर्म के संस्थापक, बहाउल्लाह को 19वीं सदी में देश निकाला दिया गया था, और उनकी अंतिम विश्राम स्थली आज के इजरायल में हाइफा के पास है।

इसी वजह से इस्लामिक गणराज्य की सरकार बहाइयों को इजरायल से जोड़ती रहती है। लेकिन उस समय तो आधुनिक इजरायल का अस्तित्व भी नहीं था; वह पुराने ओटोमन साम्राज्य का हिस्सा था।

ईरानी मूल की एक और भारतीय बहाई, रोमिना (बदला हुआ नाम) ने कहा, “1980 में मेरी बहन को उसके एक महीने के बच्चे के साथ गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया गया था। उस समय उसका एक दो साल का बच्चा भी था, जिसे उसे घर पर बिल्कुल अकेला छोड़ना पड़ा।

मेरी बहन का गुनाह क्या था? उस पर बच्चों को पढ़ाने का आरोप लगाया गया था। ईरानी सरकार बहाइयों को नास्तिक मानती है, और इसलिए उन्हें पढ़ाने से रोक दिया जाता है, खासकर नैतिक शिक्षा की कक्षाएं लेने से।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *