सुहाग की सलामती के लिए सुहागिन महिलाएं 27 जुलाई को इस बार हरियाली तीज का व्रत रखेंगी।
सुहागिनें पति की लंबी आयु तथा अखंड सौभाग्य के लिए इस दिन व्रत रखती हैं। एक धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भी भगवान शिव को पाने के लिए हरियाली तीज का व्रत रखकर कठोर तपस्या की थी।
तीज को श्रावणी तीज या सिंधारा हरियाली तीज भी कहा जाता है। ये व्रत हर साल सावन के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को आता है।
इस साल 27 जुलाई को हरियाली तीज का व्रत रखा जाएगा। हरियाली तीज को कजरी तीज और हरितालिका तीज भी कहा जाता है।
शिव पार्वती की होगी पूजा-
इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती के पूजा से विवाहित को सौभाग्यपूर्ण जीवन और उनके पतियों को दीर्घायु की प्राप्ति होती है।
महिलाएं सोलह शृंगार कर हरे रंग के वस्त्र धारण करती हैं। हरा रंग सुहाग का रंग होता है। इसे बेहद शुभ माना जाता है इस दिन ज्यादा से ज्यादा हरे रंग का प्रयोग करना चाहिए।
इसलिए इसे हरियाली तीज कहा जाता है। पूजा के दौरान भगवान को हरे रंग की वस्तुएं, जैसे भांग, धतूरा आदि अर्पण करना चाहिए।
रवि योग का शुभ संयोग
सनातन धर्म में उदया तिथि ही मान्य होती है। कोई भी पर्व त्योहार उदया तिथि के अनुसार मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार, सावन शुक्ल तृतीया तिथि 26 जुलाई की रात 10.41 बजे शुरू होगी और यह तिथि 27 जुलाई की रात 10.41 मिनट तक रहेगी।
उदया तिथि के अनुसार, हरियाली तीज 27 जुलाई को मनाई जाएगी। इस दिन रवि योग का शुभ संयोग भी बन रहा है, जो शाम 4 बजकर 23 मिनट से शुरू होकर 28 जुलाई को सुबह 5 बजकर 40 मिनट तक रहेगा।
रवि योग में पूजा करना और व्रत रखना बहुत ही शुभ फल देने वाला माना जाता है।