पश्चिम एशिया में होर्मुज स्ट्रेट से शुरू हुआ तनाव अब बाब अल मंदेब की तरफ बढ़ गया है। ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों ने मंगलवार को सऊदी अरब से भारत और चीन जा रहे दो तेल टैंकरों समेत कुल पांच जहाजों को चेतावनी देकर वापस मुड़ने को विवश कर दिया।
इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप भड़क गए और उन्होंने हूती पर भी हमले करने की चेतावनी दे डाली। उन्होंने कहा कि अगर लाल सागर में नाकेबंदी की गई, तो अमेरिका कार्रवाई करेगा। उधर, अमेरिका और ईरान के बीच लगातार 10वें दिन भीषण घमासान जारी रहा।
अमेरिका ने ईरान के नौ शहरों पर हवाई हमले किए, तो जवाब में ईरान ने बहरीन, कुवैत और जार्डन में कुल 11 अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाते हुए मिसाइलों और ड्रोन हमलों की बौछार कर दी।
सेंटकाम के अनुसार, ईरान की तरफ से होर्मुज में ओमान के क्षेत्र में एक तेल टैंकर पर हमले के साथ इसकी शुरुआत हुई। ईरान ने कुवैत पर बेरहमी दिखाते हुए लगातार चौथे दिन बिजलीघरों और जल शोधन संयंत्रों (डीसैलिनेशन प्लांट) पर हमले किए।
बता दें कि कुवैत की 90 प्रतिशत आबादी पीने के पानी के लिए ऐसे संयंत्रों पर निर्भर है। तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल पार कर गई। एपी के अनुसार, लगातार 10 दिनों से अमेरिकी हमला झेलने के बावजूद कहीं से ये संकेत नहीं मिल रहे कि होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की पकड़ ढीली हुई हो।
ब्रिटिश सेना के समुद्री व्यापार संगठन यूकेएमटीओ के अनुसार मंगलवार को होर्मुज स्ट्रेट में ओमान के समुद्री क्षेत्र में ईरानी हमले में एक टैंकर निष्क्रिय हो गया। चालक दल को जहाज से सुरक्षित निकाला गया।
केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, होर्मुज से सोमवार को कुल चार जहाज निकल सके, जो ईरान के अधिकृत उत्तरी छोर की तरफ से आगे बढ़े। रविवार को सात जहाज निकले थे।
रॉयटर के अनुसार, अमेरिकी सेंटकाम ने एक्स पर बताया कि तेल टैंकर को निशाना बनाए जाने के बाद ईरान पर नए सिरे से हमले शुरू किए गए। फार्स, होर्मोज्गान, इलाम, केरमान, सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांतों में कुल नौ शहरों पर हमले किए गए। दक्षिणी ईरान के शिराज, कोनारक और चाबहार और खोर्रमाबाद व अबादान में धमाके सुने गए।
हमलों में ईरान के सैन्य कमांड सेंटर, समुद्री क्षमताओं, मिसाइल और ड्रोन लांच साइटों और एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाए गए। हालांकि, ईरान ने कहा कि अमेरिकी सेना ने बिजली संयंत्रों और पानी के संयंत्रों पर हमले किए, जिसके जवाब में कुवैत में ऐसे ही ठिकानों को निशाना बनाया गया।
एएनआई के अनुसार, आईआरजीसी ने एक बयान में बताया कि डारखोविन परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर अमेरिकी हमलों के जवाब में बहरीन में अमेरिकी टेक कंपनी एमेजोन के डाटा सेंटर को निशाना बनाया गया।
उधर, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा कि सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के साथ दैनिक मुलाकातें अब बढ़ रही हैं। उनके निर्देशों के अनुरूप चीजें तय की जा रही हैं। धीरे-धीरे हम और मजबूत होते जाएंगे।
न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, पेंटागन ने हालिया ईरानी हमलों में 100 अमेरिकी सैनिकों के घायल होने की पुष्टि की है। वहीं, इराक के इरबिल में ईरानी ड्रोन निष्क्रिय करने के दौरान हुए विस्फोट में मारे गए अमेरिकी सैनिक की भी पहचान कर ली गई है।
पश्चिम एशिया में तनाव घटने की कम संभावना पर कनाडाई पेट्रोकेमिकल कंपनी ने इराक में अत्रुश और सारसांग आयल फील्ड में तेल उत्पादन को अस्थायी तौर पर रोक दिया है।
ईरान पर ट्रंप दुविधा में, युद्ध या युद्धविराम पर जल्द फैसला संभव
हमलों के बीच तनाव घटाने की भी प्रक्रिया जारी है और दोनों पक्ष 10 दिनों के संघर्षविराम पर सहमत होने के लिए बैकडोर चैनल के जरिये बातचीत कर रहे हैं।
एएनआई ने एक्सियोज मीडिया पोर्टल के हवाले से बताया कि ट्रंप दो विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। पहला, कतर, मिस्र, पाकिस्तान और अन्य क्षेत्रीय देशों की ओर से प्रस्तावित 10 दिन के युद्धविराम को समर्थन देना, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खोला जा सके और बातचीत का रास्ता बने। दूसरा, यदि कूटनीतिक प्रयास विफल रहते हैं तो इजरायल के साथ मिलकर नया सैन्य अभियान शुरू करना।
एपी के अनुसार, ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि ईरान के साथ बातचीत में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरान तो बातचीत के लिए बेताब है, लेकिन जब तक वे गंभीर नहीं होते तब तक बातचीत का कोई फायदा नहीं है।
उन्होंने कहा कि जल्दी ही ईरान के पिकएक्स माउंटेन इलाके के परमाणु केंद्रों पर बंकर बस्टर बम से हमले किए जाएंगे। माना जाता है कि नतांज परमाणु केंद्र के पास पहाड़ों की गहराई में दो सुरंगें बनाई गई हैं, जहां ईरान का संभावित परमाणु कार्यक्रम जारी है।
उधर, प्रेट्र के अनुसार, ईरान का एक प्रतिनिधिमंडल आंतरिक मंत्री इस्माइल मोमेनी के नेतृत्व में पाकिस्तान पहुंचा है। मोमेनी ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर और पीएम शहबाज शरीफ से भी मुलाकात की।
दोनों पक्षों ने व्यापारिक मसलों पर भी बात की, जिसमें ईरान-पाकिस्तान गैस पाइपलाइन विकसित करने पर प्रमुख रूप से चर्चा हुई। खाड़ी के ज्यादातर देश डीसैलिनेशन प्लांट पर निर्भर खाड़ी के देश समुद्र के पानी को पीने लायक बनानेवाले संयंत्रों यानी डीसैलिनेशन प्लांट पर निर्भर हैं।
रॉयटर के अनुसार, इस मामले में बहरीन और कतर शत प्रतिशत इन प्लांट पर निर्भर हैं, जबकि कुवैत 90 प्रतिशत, ओमान 86 प्रतिशत, यूएई 80 प्रतिशत और सऊदी अरब 50 प्रतिशत तक डीसैलिनेशन प्लांट पर निर्भर है। खाड़ी देशों ने आपात स्थिति के लिए भूजल को बचा रखा है।