ईरान में लगातार हो रही बड़े नेताओं की हत्याओं और सुप्रीम लीडर के सार्वजनिक रूप से सामने न आने के कारण सत्ता को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
ऐसे हालात में यह साफ नहीं है कि देश की कमान किसके हाथ में है।
इजरायल के हमलों में पहले सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हुई और इसके बाद कई अहम नेता भी मारे गए। इससे ईरान की सत्ता व्यवस्था को बड़ा झटका लगा है।
हाल ही में सुरक्षा से जुड़े बड़े चेहरे अली लारीजानी और बसिज फोर्स के प्रमुख गोलामरेजा सुलेमानी भी हमलों में मारे गए हैं।
लगातार हमलों से कमजोर हुआ नेतृत्व
इन हमलों में नेशनल डिफेंस काउंसिल के प्रमुख, IRGC के कमांडर और रक्षा मंत्री जैसे बड़े पदों पर बैठे लोग भी निशाना बने हैं।
इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ ने दावा किया कि ईरान के खुफिया मंत्री इस्माइल खतीब को भी एक हमले में मार दिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है और आगे भी बड़े हमले हो सकते हैं।
ईरान ने 9 मार्च को मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर घोषित किया था। लेकिन वह अपने पिता और परिवार की मौत के बाद से अब तक सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं।
उनकी गैरमौजूदगी से यह सवाल और बढ़ गया है कि असल में देश की कमान कौन संभाल रहा है।
IRGC बना सबसे ताकतवर केंद्र
इस पूरे संकट के बीच इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) सबसे ताकतवर संस्था बनकर उभरी है। इसे लंबे समय से देश के भीतर एक अलग राज्य जैसा माना जाता है, जिसकी पकड़ सेना, राजनीति और अर्थव्यवस्था तक है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मौजूदा हालात में IRGC काफी हद तक खुद फैसले ले रहा है और युद्ध की रणनीति तय कर रहा है।
अब ध्यान सादेक लारीजानी पर है, जो मारे गए अली लारीजानी के भाई हैं और सिस्टम में बड़े पद पर हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि वह IRGC के लिए स्वीकार्य नेता हो सकते हैं।
इसके अलावा संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ भी इस दौड़ में एक अहम नाम हैं, जिनके IRGC से पुराने संबंध रहे हैं।
अंदरूनी खींचतान
आधिकारिक तौर पर ईरान में तीन लोगों की एक अंतरिम नेतृत्व परिषद बनाई गई है। इसमें राष्ट्रपति मसू्द पेज़ेश्कियन, धर्मगुरु अलीरेजा आराफी और न्यायपालिका प्रमुख गोलाम-हुसैन मोहसेनी एजई शामिल हैं।
लेकिन अंदरखाने सत्ता को लेकर मतभेद भी हैं, जहां कुछ गुट मोजतबा खामेनेई के समर्थन में हैं, जबकि अन्य नेता अलग विकल्प चाहते थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हत्याओं के बाद ईरान का नेतृत्व और ज्यादा सख्त और कट्टर हो सकता है।
विश्लेषक वली नसर के मुताबिक, हर हमले के बाद सत्ता में और ज्यादा कठोर सोच वाले लोग आगे आ सकते हैं। इससे न सिर्फ ईरान बल्कि पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ सकता है और हालात और जटिल हो सकते हैं।