सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राजस्थान के गैरकानूनी धर्मांतरण निषेध अधिनियम, 2025 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने की सहमति दे दी।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्य बागची की पीठ ने राजस्थान सरकार और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर याचिका पर जवाब मांगा है।
पीठ ने इस याचिका को अधिनियम 2025 की वैधता को चुनौती देने वाली अन्य लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ दिया है। नई याचिका में इस अधिनियम को संविधान के तीसरे भाग के अधिकार क्षेत्र से बाहर बताते हुए इसे असंवैधानिक और अमान्य घोषित करने की मांग की गई है।
अलग याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मांगा था जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले राजस्थान सरकार और अन्य से एक अलग याचिका पर जवाब मांगा था, जिसमें राजस्थान गैरकानूनी धर्मांतरण निषेध अधिनियम, 2025 की वैधता को चुनौती दी गई थी।
राज्य विधानसभा द्वारा सितंबर में पारित इस अधिनियम के खिलाफ दायर याचिका पर कोर्ट ने नोटिस जारी किया था।
इन राज्यों की याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, झारखंड और कर्नाटक सहित कई राज्यों द्वारा अधिनियमित धर्मांतरण विरोधी कानूनों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक समूह पर भी सुनवाई कर रहा है।