सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि गुजरात नगर निकाय चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए यह जरूरी है कि वे चुनाव हलफनामे में न केवल अपनी, बल्कि अपने जीवनसाथी की संपत्ति की जानकारी भी दें।
शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि मामले का संज्ञान लेते समय मजिस्ट्रेट द्वारा गलत कानूनी प्रविधान लागू करने की त्रुटि को सुधारा जा सकता है। इससे आपराधिक कार्यवाही अपने-आप अमान्य नहीं हो जाती।
जस्टिस संजय करोल और एनके सिंह की पीठ ने गुजरात की पूर्व निगम पार्षद चंद्रिकाबेन किशोर डफडा की अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए यह निर्देश जारी किया।
चंद्रिकाबेन ने 2015 के गुजरात नगर निकाय चुनाव के लिए अपने चुनाव हलफनामे में पति की कुछ अचल संपत्तियों की जानकारी नहीं देने के आरोप में अपने खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही को चुनौती दी थी। हालांकि, कोर्ट ने आपराधिक मामले को रद नहीं किया।