आयकर अपीलीय ट्रिब्यूनल में रिक्त पदों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, समाधान के लिए अटॉर्नी जनरल से मांगी सहायता…

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आयकर अपीलीय ट्रिब्यूनल में कर्मचारियों और सदस्यों की रिक्तियों से संबंधित याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा और सभी हाई कोर्ट को निर्देश दिया कि वे इन रिक्तियों को भरने के लिए प्रतिनियुक्ति पर न्यायिक अधिकारियों को भेजें।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्य बागची की पीठ ने केंद्र को नोटिस जारी किया और इस मामले में अटार्नी जनरल आर वेंकटरामानी से सहायता मांगी।

याचिका अटार्नी जनरल के कार्यालय को भेजी जाए ताकि आयकर अपीलीय ट्रिब्यूनल में रिक्त पदों को जल्द से जल्द भरा जा सके। अंतरिम उपाय के रूप में ट्रिब्यूनल हाई कोर्ट से न्यायिक अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर भेजने का अनुरोध कर सकते हैं।

शीर्ष न्यायालय आयकर अपीलीय ट्रिब्यूनल के पूर्व उपाध्यक्ष प्रवीन कुमार बंसल द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने बताया कि रजिस्ट्रार समेत अधिकारियों के सभी पद कई वर्षों से रिक्त पड़े हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने आश्चर्य व्यक्त किया कि ये पद इतने लंबे समय से रिक्त क्यों हैं और मुकुल रोहतगी को आश्वासन दिया कि वह प्रशासनिक स्तर पर इस मामले की जांच करेगा

केजी-बेसिन गैस विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने सुलह प्रक्रिया पर सहमति जताई

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के साथ कृष्णा-गोदावरी (केजी) बेसिन गैस विवाद को आपसी सहमति से सुलझाने की अनुमति की मांग वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआइएल) की नई याचिका को स्वीकार कर लिया है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने इस संबंध में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की ओर से किए गए उल्लेख का संज्ञान लिया।

सिब्बल ने कोर्ट से कहा कि सुलह की प्रक्रिया के लिए आवेदन किया गया है, जिस पर अटार्नी जनरल आर वेंकटरमनी ने कहा कि सरकार इस अनुरोध पर विचार करने को तैयार है। इस पर शीर्ष न्यायासय ने मामले की सुनवाई जुलाई के तीसरे सप्ताह तक के लिए स्थगित कर दी।

पीठ ने कहा कि यदि दोनों पक्ष आपसी सहमति से समाधान निकाल लेते हैं, तो अपील का निपटारा कर दिया जाएगा। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि यदि विवाद सुलह के जरिए सुलझता है तो हमें खुशी होगी। आप समझौते के साथ आते हैं तो हम अपील का निपटारा कर देंगे।

विधि छात्रों के लिए न्यूनतम उपस्थिति संबंधी दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें न्यूनतम उपस्थिति की शर्त पूरी नहीं करने वाले छात्रों को परीक्षा में बैठने से रोकने पर ला कालेजों व विश्वविद्यालयों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। शीर्ष अदालत ने कहा कि सभी राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय इससे प्रभावित हो रहे हैं।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने यह आदेश बार काउंसिल आफ इंडिया समेत विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया। इनमें हाई कोर्ट के नवंबर, 2025 के फैसले को चुनौती दी गई थी।

याचिकाओं पर सुनवाई 21 जुलाई तय करते हुए पीठ ने कहा कि विवादित फैसले के पैरा-249 के क्रियान्वयन पर रोक रहेगी और यह आगे की तिथि से लागू होगा। फैसले की इसी पैरा में उपस्थिति नियमों के संबंध में निर्देश दिए गए थे।

पीठ ने कहा कि छात्र अनिवार्य उपस्थिति नहीं चाहते

पीठ ने कहा कि छात्र अनिवार्य उपस्थिति नहीं चाहते, लेकिन अगर छात्र कक्षाओं में नहीं आएंगे, तो एनएलयू और अन्य विश्वविद्यालय के अध्यापक क्या करेंगे? दिल्ली हाई कोर्ट ने उक्त फैसला 2016 में विधि छात्र सुशांत रोहिल्ला की आत्महत्या से जुड़ा था।

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