सुप्रीम कोर्ट ने सुखना झील को लेकर जताई चिंता, पूछा– ‘और कितना सुखाओगे?’…

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने बुधवार को बिल्डर माफिया और अधिकारियों की मिलीभगत के कारण चंडीगढ़ की प्रसिद्ध सुखना झील के सूखने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने टिप्पणी की, “सुखना झील को और कितना सुखाओगे।”

प्रधान न्यायाधीश, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ 1995 की लंबित ‘टीएन गोदावर्मन थिरुमुलपाद’ शीर्षक वाली जनहित याचिका में दायर अंतरिम आवेदनों पर सुनवाई कर रही थी।

जब एक वकील ने झील से संबंधित एक याचिका का जिक्र किया तो जस्टिस सूर्यकांत ने मौखिक टिप्पणी की, “सुखना झील को और कितना सुखाओगे? पंजाब में राजनीतिक संस्थाओं के समर्थन और अधिकारियों की मिलीभगत व साठगांठ से अवैध निर्माण हो रहे हैं, जिससे झील पूरी तरह से बर्बाद हो रही है। सभी बिल्डर माफिया वहां काम कर रहे हैं।”

सुप्रीम कोर्ट ने जताई थी हैरानी

सुप्रीम कोर्ट ने पहले हैरानी जताई थी कि जंगल और झीलों से जुड़े सभी मामले हाई कोर्ट को छोड़कर सीधे सुप्रीम कोर्ट में क्यों आ रहे हैं, वह भी 1995 की लंबित जनहित याचिका में अंतरिम आवेदनों के रूप में।

सुखना झील मामले से संबंधित एक आवेदन का जिक्र करते हुए प्रधान न्यायाधीश ने कहा था, ऐसा लग रहा है कि कुछ निजी डेवलपर्स और अन्य लोगों के इशारे पर दोस्ताना मैच चल रहा है। कोर्ट ने केंद्र की ओर से पेश एएसजी ऐश्वर्य भाटी और न्यायमित्र के. परमेश्वर से उन स्थानीय मुद्दों के बारे में बताने को कहा था, जिनसे हाई कोर्ट खुद निपट सकते हैं।

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